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600 से ज्यादा कॉलेज निकले फर्जी हाईकोर्ट सख्त CBI और नर्सिंग काउंसिल को जवाब देना होगा


जबलपुर । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब जवाबदेही से बचना संभव नहीं होगा इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने CBI इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को अगली तारीख से पहले विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है कोर्ट ने CBI को निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई तक यह स्पष्ट करे कि जांच के दौरान किन व्यक्तियों और संस्थानों की संलिप्तता सामने आई है और अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है

इसके साथ ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को भी यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जिन्होंने मानकों को नजरअंदाज कर अनुपयुक्त कॉलेजों को मान्यता दी इन संस्थाओं को अपने हलफनामे में स्पष्ट करना होगा कि किन प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों के जरिए ऐसे कॉलेजों को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा कसा गया है

यह पूरा मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है जिसे लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने दायर किया था याचिका में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2020-21 के दौरान मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में फर्जी और अमानक नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई जिसके चलते शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जब CBI ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए करीब 800 नर्सिंग कॉलेजों की जांच में से लगभग 600 कॉलेज या तो पूरी तरह से अनुपयुक्त पाए गए या उनमें बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी कई कॉलेजों में भवन लैब लाइब्रेरी और अनुभवी शिक्षकों जैसी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद ही नहीं थीं इतना ही नहीं कुछ संस्थान केवल कागजों पर संचालित हो रहे थे और कई जगह एक ही शिक्षक या प्रिंसिपल को कई कॉलेजों में कार्यरत दिखाया गया था

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि CBI द्वारा अपात्र घोषित किए गए 117 कॉलेजों के छात्रों को अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित करने के बजाय उन्हीं कॉलेजों में परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं इससे छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं

दूसरी ओर मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने कोर्ट से परीक्षाओं और परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी है हालांकि हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लेते हुए दोनों पक्षों के आवेदन लंबित रखे हैं और साफ किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा

अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां और संबंधित संस्थाएं कोर्ट के सामने क्या जवाब पेश करती हैं और इस बड़े घोटाले में कितनों पर कार्रवाई होती है

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