MP Monsoon Session : मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। पांच दिन तक चलने वाले इस सत्र को लेकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंजूरी दे दी है। आपको बता दे कि इस बार सत्र में सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। इसके अलावा नए वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी सदन में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
UCC पर आगे बढ़ सकती है सरकार
राज्य सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर लगातार तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लोगों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में लाया जा सकता है और फिर विधानसभा से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मानसून सत्र में आएगा अनुपूरक बजट
सरकार मानसून सत्र के दौरान नए वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी पेश करेगी। इसे लेकर वित्त विभाग समेत अन्य विभागों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। 20 जुलाई से 23 जुलाई तक सदन में प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य होंगे, जबकि 24 जुलाई को प्रश्नोत्तर के साथ अशासकीय संकल्पों पर भी चर्चा की जाएगी।
विधानसभा सचिवालय ने विधायकों के लिए विभिन्न प्रस्तावों और सूचनाओं की समय-सीमा भी तय कर दी है। अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 जून तक और अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 9 जुलाई तक दी जा सकेंगी। वहीं स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण और नियम 267-क के तहत सूचनाएं 14 जुलाई तक स्वीकार की जाएंगी।
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क्या है UCC?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता ऐसा कानून है, जिसके तहत सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू होता है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों की जगह एक समान व्यवस्था लागू करने का प्रावधान होता है।
मध्य प्रदेश में UCC को लेकर बनाई गई समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।
विपक्ष ने उठाए सत्र की अवधि पर सवाल
मानसून सत्र की अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ पांच दिन का सत्र प्रदेश के अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, बढ़ते कर्ज, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
उमंग सिंघार ने कहा कि विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है और सत्र जितना लंबा चलेगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रदेश से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सदन में उठाएगा।