पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले साल भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन वियतनाम में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने किए। उन्होंने चंपा सभ्यता की पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यह साझेदारी सिर्फ विकास नहीं, बल्कि विरासत को भी सहेजने का प्रयास है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, पर्यटन, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब इन्हें और विस्तार देने का समय है।
इस दौरान हुए 13 समझौते कई अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और वियतनाम के स्टेट बैंक के बीच डिजिटल पेमेंट सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा नियमन, और आईटी सेक्टर में साझेदारी जैसे समझौते भविष्य की आर्थिक मजबूती की दिशा तय करते हैं।
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का यह भारत का पहला राजकीय दौरा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर में पूजा के साथ की। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने किया।
बैठक से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति लाम से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, हैदराबाद हाउस में हुई यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की मजबूत साझेदारी का रोडमैप साबित हुई है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी।