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अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

नई दिल्ली । अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दुर्घटना के कारणों पर चल रही जांच के बीच पायलटों के एक प्रमुख संगठन ने आधिकारिक अंतरिम निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए नई तकनीकी जानकारी सामने रखी है। संगठन का दावा है कि उपलब्ध सिम्युलेटर परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि दुर्घटना की मुख्य वजह किसी पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि विमान में उत्पन्न हुई गंभीर विद्युत प्रणाली की विफलता हो सकती है।

विमान दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच निष्कर्षों में यह संकेत दिया गया था कि इंजन को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति बंद होने के कारण विमान की शक्ति प्रणाली प्रभावित हुई और कुछ ही सेकेंड के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि अब पायलट संगठन ने इस निष्कर्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके द्वारा कराए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण आधिकारिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते।

संगठन के अनुसार, दुर्घटना से पहले विमान के वजन, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्युलेटर पर कई परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में यह पाया गया कि यदि ईंधन आपूर्ति को मैन्युअल रूप से बंद किया जाए तो बैकअप पावर सिस्टम को सक्रिय होने में आधिकारिक दावे की तुलना में काफी अधिक समय लगता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर जांच की दिशा और निष्कर्षों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान में विद्युत प्रणाली की व्यापक विफलता अनेक अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि उड़ान के महत्वपूर्ण चरण में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो इंजन नियंत्रण, संचार प्रणाली और अन्य सुरक्षा तंत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। पायलट संगठन इसी संभावना की ओर संकेत करते हुए कह रहा है कि दुर्घटना की जड़ में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

दुर्घटना से जुड़े कुछ विवरणों का हवाला देते हुए संगठन ने यह भी दावा किया कि विमान में उड़ान के अंतिम क्षणों से पहले विद्युत असामान्यताओं के संकेत देखे गए थे। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में अचानक और व्यापक स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई हो सकती है। यही कारण है कि संगठन ने जांच एजेंसियों से सभी तकनीकी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।

विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की जांच में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। आधुनिक विमानों में हजारों तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उड़ान डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, रखरखाव इतिहास और तकनीकी परीक्षणों का व्यापक अध्ययन किया जाता है। इसलिए किसी भी वैकल्पिक तकनीकी संभावना को पूरी तरह खारिज करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक माना जाता है।

इस बीच पायलट संगठन ने संबंधित तकनीकी आंकड़े और परीक्षण परिणाम विमान निर्माता तथा विमानन अधिकारियों को सौंपने का दावा किया है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सामने लाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

अहमदाबाद विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। अब जांच के इस नए मोड़ ने तकनीकी विशेषज्ञों, विमानन समुदाय और आम लोगों के बीच दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अंतिम निष्कर्ष आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

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