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ऑपरेशन हमदर्द बना अपनों तक पहुंचने का सहारा, जीआरपी तैयार कर रही बेसहारा लोगों का डिजिटल डोजियर


मध्य प्रदेश। रेलवे स्टेशन अक्सर हजारों यात्रियों की आवाजाही के साथ कई ऐसी कहानियों के भी गवाह बनते हैं, जहां कोई अपनों से बिछड़ जाता है तो कोई मजबूरी में स्टेशन को ही अपना ठिकाना बना लेता है। ऐसे ही लोगों को नई जिंदगी और परिवार का साथ दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जीआरपी ने ‘ऑपरेशन हमदर्द’ शुरू किया है। यह अभियान केवल बेसहारा लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उनके परिवार से मिलाने और जरूरतमंदों के पुनर्वास का भी माध्यम बन रहा है।

एक जुलाई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, लावारिस और बिछड़े लोगों का डिजिटल डोजियर तैयार किया जा रहा है। इसमें उनकी तस्वीर, पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान आसान हो सके और परिजनों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया जा सके। अभियान के शुरुआती 11 दिनों में ही 363 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। केवल शनिवार को ही 31 लोगों की पहचान दर्ज की गई, जिनमें 21 पुरुष, 7 महिलाएं, 2 बालक और एक बालिका शामिल रहे।

अभियान के दौरान कई भावुक कर देने वाले मामले भी सामने आए। आमला रेलवे स्टेशन पर मिले मोहम्मद कौशर करीब दस वर्षों से भीख मांगकर जीवन गुजार रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बिहार के बेगूसराय का पता बताया। जीआरपी ने स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मदद से उनके परिवार का पता लगाया। जब वीडियो कॉल पर वर्षों बाद भाई से बातचीत हुई तो दोनों की आंखें नम हो गईं। बाद में परिवार भोपाल पहुंचा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कौशर को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

एक अन्य मामले में आमला स्टेशन पर मिली 16 वर्षीय किशोरी ने बताया कि घर में डांट पड़ने के बाद वह नाराज होकर बिना बताए निकल आई थी। जीआरपी ने तुरंत उसके पिता से संपर्क किया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सुरक्षित परिवार तक पहुंचा दिया।

ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर भी दो छोटे भाई-बहन अकेले बैठे रोते मिले। उनके पिता मोबाइल चार्जर लेने बाहर गए थे और लौटने में देर हो गई थी। बच्चों की घबराहट देखकर जीआरपी ने उन्हें सुरक्षित रखा और कुछ ही देर में पिता को तलाश कर दोनों बच्चों को उनके हवाले कर दिया।

जीआरपी अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल पहचान दर्ज करना नहीं है, बल्कि बेसहारा लोगों को सामाजिक संस्थाओं और आश्रय गृहों से जोड़कर उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित करना है। वहीं, नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।

‘ऑपरेशन हमदर्द’ तकनीक और संवेदनशील पुलिसिंग का ऐसा प्रयास बनकर उभरा है, जो रेलवे स्टेशनों पर भटक रहे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रहा है। डिजिटल डोजियर के जरिए न केवल उनकी पहचान सुरक्षित हो रही है, बल्कि उन्हें अपनों तक पहुंचाने और सम्मानजनक जीवन दिलाने की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है।

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