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पासपोर्ट इंडेक्स 2026: भारत की बड़ी छलांग, पाकिस्तान अब भी फिसला हुआ; अमेरिका-UK की रफ्तार भी धीमी


नई दिल्ली। दुनिया में पासपोर्ट की ताकत तय करती है कि कोई नागरिक कितने देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकता है। इसी आधार पर जारी हुई Henley Passport Index 2026 रिपोर्ट में इस बार भी वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। भारत ने जहां अपनी स्थिति में सुधार करते हुए उल्लेखनीय छलांग लगाई है, वहीं कई विकसित देश पिछड़ते नजर आए हैं और पाकिस्तान की स्थिति अब भी निचले पायदान पर बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है, जिसके नागरिक 192 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जिनकी वीजा-मुक्त पहुंच 187 देशों तक है। खास बात यह है कि एशिया के बाहर UAE का पासपोर्ट सबसे मजबूत माना जा रहा है, हालांकि अमेरिका में अभी भी इसके नागरिकों को वीजा की आवश्यकता होती है।

यूरोप में नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे देश भी मजबूत स्थिति में हैं, जबकि यूरोपीय संघ के भीतर भी अलग-अलग देशों की रैंकिंग में मामूली अंतर देखा गया है।

भारत के लिए इस साल की रिपोर्ट राहत और प्रगति दोनों लेकर आई है। भारतीय पासपोर्ट 85वें स्थान से छलांग लगाकर 75वें स्थान पर पहुंच गया है। अब भारतीय नागरिक 56 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा का लाभ ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह बढ़त कई देशों के साथ बढ़ते द्विपक्षीय समझौतों और कूटनीतिक रिश्तों का परिणाम है।

दूसरी ओर पाकिस्तान की स्थिति में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वह अभी भी 98वें स्थान पर है। पाकिस्तान के नागरिक केवल 31 देशों में ही बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को कमजोर श्रेणी वाले देशों में शामिल किया गया है, जहां अफगानिस्तान, इराक और यमन जैसे देश भी मौजूद हैं।

रिपोर्ट का एक और अहम पहलू विकसित देशों की गिरती रैंकिंग है। अमेरिका, जो कभी टॉप पर हुआ करता था, अब 10वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं ब्रिटेन 6वें स्थान पर, जबकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया टॉप-5 से बाहर हो चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सख्त वीजा नीतियों और वैश्विक समझौतों में कमी की वजह से इन देशों की रैंकिंग प्रभावित हुई है।

कुल मिलाकर, Henley Passport Index 2026 यह साफ संकेत देता है कि वैश्विक कूटनीति और आपसी समझौतों का सीधा असर पासपोर्ट की ताकत पर पड़ रहा है। जहां एशियाई देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ पारंपरिक शक्तियां अपनी पकड़ कमजोर करती दिख रही हैं।

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