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इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी


मध्यप्रदेश । इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता रहा है, आज गंभीर जल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर ने शहर की पानी व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं, और नल-जल आपूर्ति भी अनियमित हो गई है। नतीजतन, हजारों परिवार अब पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।

शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां कई कॉलोनियों में दो-दो दिन बाद पानी पहुंच रहा है। लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर विवाद और झड़पें तक सामने आ रही हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे भी इस संकट से परेशान हैं।

स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चक्काजाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी आम हो गई है। कई जगह लोगों ने खुले तौर पर कहा है कि “ऐसे नेताओं को वोट नहीं देंगे।” विकास नगर और वीणा नगर जैसे क्षेत्रों में लोगों ने पार्षदों के साथ सड़क जाम कर पानी की मांग की। वहीं कुछ इलाकों में गुस्साई भीड़ ने पानी सप्लाई सिस्टम तक को नुकसान पहुंचाया।

नगर निगम का कहना है कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और आधे से ज्यादा बोरिंग के सूखने से यह संकट पैदा हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए नर्मदा परियोजना की टंकियों से सप्लाई के साथ-साथ सैकड़ों टैंकरों के जरिए पानी वितरण किया जा रहा है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी के बदले पैसे मांगने या अवैध वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कई बिना स्टीकर वाले टैंकर पकड़े गए और उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

इंदौर में पानी की किल्लत अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है। कांग्रेस ने कई इलाकों में मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जबकि नागरिक लगातार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि न तो नियमित सप्लाई हो रही है और न ही टैंकर समय पर पहुंच रहे हैं।

महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई जगह लोगों ने साफ कहा है कि “पानी नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं देंगे।”

वार्ड-वार स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड 20, 41, 47, 60 और 64 सहित कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं पानी गंदा आ रहा है तो कहीं प्रेशर बेहद कम है। कई इलाकों में लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।

इंदौर का जल संकट अब एक बड़े शहरी संकट का रूप ले चुका है, जहां स्वच्छता की पहचान रखने वाला शहर आज बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

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