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सेशेल्स दौरे में पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक संदेश, हिंद महासागर क्षेत्र को सहयोग, सुरक्षा और अवसरों का साझा मंच बनाने की अपील

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपनी सेशेल्स यात्रा के दूसरे दिन हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण ‘महासागर विजन’ को फिर से रेखांकित किया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई रणनीतियों पर जोर बढ़ रहा है। भारत का यह दृष्टिकोण हिंद महासागर को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि साझा अवसरों और साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेशेल्स में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत एक ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है जहां आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग केवल बड़े देशों के नेतृत्व पर आधारित न होकर आपसी सम्मान और भरोसे की नींव पर आगे बढ़ना चाहिए। यह संदेश भारत की उस कूटनीतिक नीति को दर्शाता है जिसमें छोटे द्वीपीय देशों की भूमिका को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर सभी देशों का साझा घर है और इसकी सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस विचार को भारत के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन का आधार बताया। यह नीति भारत की समुद्री रणनीति को स्थानीय सीमाओं से आगे ले जाकर वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

महासागर विजन की शुरुआत मार्च 2025 में की गई थी, जिसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सहयोग, सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है। इस पहल के तहत भारत छोटे देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने, समुद्री गतिविधियों की निगरानी क्षमता बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य ग्लोबल साउथ के देशों को साझा मंच पर लाकर उनकी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना भी है।

सेशेल्स में अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य किसी भी देश के साथ अलग-अलग संवाद करने के बजाय सामूहिक रूप से आगे बढ़ना है। उन्होंने जोर दिया कि हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाने के लिए सभी देशों की भागीदारी आवश्यक है। यह दृष्टिकोण क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करने की क्षमता रखता है।

भारत और सेशेल्स के बीच यह संवाद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन और विकास के नए अवसर भी खोलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भविष्य में समुद्री व्यापार, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को नई ऊंचाई तक ले जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत अब समुद्री कूटनीति को केवल रणनीतिक जरूरत के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और साझा विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है।

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