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झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच जारी विवाद अब समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने की सहमति हो गई है। इससे पहले झामुमो के विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया था, जिससे गठबंधन में तनातनी बढ़ गई थी।

पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को झामुमो ने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। बैद्यनाथ राम लातेहार से पूर्व विधायक रह चुके हैं और आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है। झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैद्यनाथ राम पार्टी के मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

जानकारी के अनुसार, इस विवाद को सुलझाने में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक, भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने सीएम हेमंत सोरेन से लंबी चर्चा की। इसके बाद सीएम ने दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर उम्मीदवार तय करने पर सहमति दे दी। राज्यसभा की दो सीटों पर अब कांग्रेस और जेएमएम के एक-एक उम्मीदवार मैदान में होंगे।

बताया जा रहा है कि झारखंड में पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रणव झा का नाम घोषित कर दिया था, जिससे जेएमएम नेतृत्व में नाराजगी उत्पन्न हो गई थी। पार्टी के नेताओं का आरोप था कि कांग्रेस ने जेएमएम को विश्वास में लिए बिना नाम की घोषणा की थी। हालांकि अब दोनों पार्टियों के बीच सभी मतभेद दूर होते दिख रहे हैं और सहमति से उम्मीदवार तय हो गए हैं।

सीएम हेमंत सोरेन ने रविवार रात गठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर बुलाया। इस बैठक का मकसद गठबंधन के भीतर आपसी सामंजस्य बनाए रखना और भविष्य में सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। इससे पहले JMM की ओर से दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब विवाद खत्म होकर गठबंधन में स्थिरता लौट आई है।

राज्यसभा चुनाव से पहले इस तरह का समाधान महागठबंधन के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों दलों की आपसी सहमति से न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय होगा, बल्कि भविष्य में झारखंड में गठबंधन को भी मजबूती मिलेगी। बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति से आदिवासी और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया है।

हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन JMM और कांग्रेस के बीच विवाद के शांत होने से महागठबंधन की छवि बेहतर बनी है। दोनों दलों के नेताओं ने आपसी सहयोग और संवाद को ही भविष्य में निर्णय लेने का आधार बनाने का संकल्प जताया है। इससे राज्यसभा चुनाव की तैयारी और रणनीति को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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