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भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी लागू होने की तैयारी, टैरिफ छूट से बदल सकती है एक्सपोर्ट तस्वीर


नई दिल्ली । भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी सीईपीए के लागू होने की संभावना के साथ भारतीय व्यापार जगत में नई उम्मीदें जगी हैं। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल व्यापार में वृद्धि होगी बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए खाड़ी क्षेत्र के बाजारों में प्रवेश और आसान हो जाएगा। लंबे समय से स्थिर बने हुए भारत–ओमान व्यापार को अब नई दिशा मिलने की संभावना है, जिससे विभिन्न उद्योगों में विस्तार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से भारत का ओमान को निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर के स्तर पर स्थिर बना हुआ था, जिसमें अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी जा रही थी। लेकिन सीईपीए लागू होने के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। समझौते के तहत लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क मुक्त पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे भारतीय उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धी बनेगी और उनकी मांग में वृद्धि हो सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे करीब 3.64 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर मौजूदा शुल्क समाप्त हो जाएगा, जो अभी तक पांच प्रतिशत तक के टैक्स के दायरे में आता था।

इस समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, रत्न एवं आभूषण और वस्त्र उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा। इन क्षेत्रों को ओमान के बाजार में लगभग शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। खासकर दवा उद्योग और इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए ऑर्डर और दीर्घकालिक व्यापार संभावनाएं बन सकती हैं।

इसके अलावा यह समझौता भारत को खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक दृष्टि से और मजबूत स्थिति में लाने में मदद कर सकता है। ओमान एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, जो व्यापारिक मार्गों के लिहाज से भी अहम माना जाता है। ऐसे में यह समझौता भारतीय वस्तुओं के परिवहन और वितरण को अधिक सुगम बनाने में सहायक हो सकता है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आने की संभावना है।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से केवल बड़े उद्योग ही नहीं बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों को भी लाभ मिल सकता है। नए बाजारों तक पहुंच आसान होने से एमएसएमई सेक्टर को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का अवसर मिलेगा। साथ ही निर्यात में विविधता आने से भारत का व्यापार पोर्टफोलियो अधिक मजबूत और स्थिर हो सकता है।

कुल मिलाकर यह समझौता भारत और ओमान के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। आने वाले समय में यदि इसका प्रभाव अपेक्षाओं के अनुरूप रहा तो भारतीय निर्यात क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे देश की वैश्विक व्यापार स्थिति और अधिक मजबूत होने की संभावना है।

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