भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ग्रीर के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से यह संकेत भी दिया कि आने वाले दिनों में व्यापार संबंधों को नई दिशा देने वाले फैसले सामने आ सकते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार ग्रीर भारत दौरे के बाद उज्बेकिस्तान जाएंगे लेकिन उससे पहले उनका पूरा ध्यान भारत के साथ व्यापारिक बातचीत को आगे बढ़ाने पर रहेगा।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह दौरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में शुरू की गई व्यापक व्यापार वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों नेताओं ने उस समय आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया था। इसके बाद से दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न स्तरों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस विषय पर गहन चर्चा हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने तब संकेत दिया था कि समझौते से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और शेष विषयों पर तेजी से काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक कई लंबित मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बाजार पहुंच शुल्क व्यवस्था निवेश सहयोग और व्यापारिक नियमों से जुड़े विषय वार्ता के केंद्र में रहने वाले हैं।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक दशक में व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। तकनीक मैन्युफैक्चरिंग ऊर्जा फार्मास्यूटिकल्स सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही रक्षा नई तकनीक महत्वपूर्ण खनिज शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत हुई है।
हालांकि कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी बने हुए हैं। अमेरिका लंबे समय से भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग करता रहा है जबकि भारत घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाने पर जोर देता है। इसके बावजूद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि एक व्यापक और संतुलित व्यापार समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों निवेशकों और उद्योग जगत को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका की साझेदारी और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है।