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नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी


नई दिल्ली।
भारत (India) की जमीन कब्जा करने के नेपाली पीएम बालेन शाह (Nepali PM Balen Shah) के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रक्रिया दी है। कहा कि सीमा विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र है, जिसके जरिये समाधान निकाला जाएगा। साथ ही इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) से सटे नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बालेन शाह के बयान के खिलाफ डडेलधुरा समेत कई स्थानों पर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) पर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगडंडी मार्गों, चेकपोस्टों और सीमावर्ती गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां सीमा अपेक्षाकृत खुली है और लोगों का आवागमन अधिक रहता है।


एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त

मंगलवार को बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने संयुक्त गश्त की। इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी जारी रहेगी।


बालेन शाह के बयान पर विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान को भी देखा है।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा निर्धारित हो चुका है, फिर भी कुछ हिस्से को सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने सीमा संबंधी सभी मामलों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

हाल में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जायसवाल ने कहा कि हम संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अंदरूनी मामलों पर ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

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