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राधा यादव बोलीं- विमेंस प्रीमियर लीग ने बदला मेरा खेल, नई तैयारी और बेहतर प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में वापसी


नई दिल्ली ।
करीब 11 महीने बाद भारतीय महिला टी20 टीम में वापसी करने वाली बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव ने अपनी इस वापसी का श्रेय विमेंस प्रीमियर लीग को दिया है। उनका कहना है कि इस टूर्नामेंट ने न केवल उनके खेल में तकनीकी सुधार किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से भी तैयार किया। उन्होंने माना कि लगातार अभ्यास, टीम प्रबंधन का सहयोग और अनुभवी खिलाड़ियों से मिली सीख उनके प्रदर्शन में सुधार की सबसे बड़ी वजह रही।

राधा यादव ने कहा कि विमेंस प्रीमियर लीग के दौरान उन्होंने अपने खेल के कई पहलुओं पर विशेष रूप से काम किया। बल्लेबाजी में अधिक ताकत के साथ शॉट खेलने, डेथ ओवरों में तेज रन बनाने, गेंदबाजी में गति बदलने और विविधताओं का प्रभावी उपयोग करने जैसी क्षमताओं को उन्होंने बेहतर बनाया। उनका मानना है कि इन सुधारों ने उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने टीम प्रबंधन के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्हें अपने खेल को अपनी शैली में विकसित करने की पूरी स्वतंत्रता मिली। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक बना और वे अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर सकीं।

राधा ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार साथी खिलाड़ियों, कोच और यहां तक कि विपक्षी खिलाड़ियों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि दूसरे गेंदबाजों की रणनीति, फील्ड सेटिंग और दबाव में प्रदर्शन करने के तरीके को समझना किसी भी खिलाड़ी के विकास में अहम योगदान देता है।

स्पिन गेंदबाजी को लेकर उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य विकेट हासिल करना और विपक्षी टीम की रन गति पर नियंत्रण बनाए रखना होता है। उनका मानना है कि एक स्पिनर को अपनी ताकत और विविधताओं पर भरोसा रखते हुए लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करनी चाहिए, क्योंकि यही सफलता की कुंजी है।

राधा यादव ने विमेंस प्रीमियर लीग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। उन्होंने कहा कि पहले घरेलू क्रिकेट से सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन अब इस लीग के माध्यम से उन्हें उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा और दबाव का अनुभव पहले ही मिल जाता है। इससे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को जल्दी ढालने में मदद मिल रही है।

उन्होंने भारतीय महिला टीम के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि टीम के भीतर ऐसा माहौल बनाया गया है जहां हर खिलाड़ी खुलकर अपने विचार रख सकता है। उनके अनुसार यही सकारात्मक वातावरण खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और टीम के सामूहिक प्रदर्शन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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