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सड़क विकास को मिली रफ्तार, बंगाल ने सात हाईवे खंड केंद्र को ट्रांसफर करने का रास्ता साफ किया

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सड़क ढांचे को मजबूत करने और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के सात प्रमुख खंडों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटके हुए बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना बन गई है।

इन सात खंडों का संचालन अब तक राज्य के लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अंतर्गत किया जा रहा था। केंद्र सरकार की ओर से लगातार अनुरोध किए जाने के बावजूद इन मार्गों के हस्तांतरण में देरी हो रही थी, जिससे कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी थीं। अब इस मंजूरी के साथ केंद्रीय एजेंसियों को इन मार्गों पर बिना किसी बाधा के कार्य शुरू करने का अवसर मिल सकेगा।

एनएचएआई को जिन प्रमुख खंडों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनमें एनएच-312 का वह महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है जो जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बसीरहाट को जोड़ते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा तक जाता है। इसके अलावा बिहार से पश्चिम बंगाल सीमा को जोड़ने वाले एनएच-31 और फरक्का तक पहुंचने वाले एनएच-33 के हिस्से भी इसमें शामिल हैं। ये सभी मार्ग व्यापार और सीमा कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर, एनएचआईडीसीएल को जिन खंडों की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें सेवक आर्मी कैंटोनमेंट से लेकर कोरोनेशन ब्रिज, कालिम्पोंग और पश्चिम बंगाल-सिक्किम सीमा तक जाने वाला नया एनएच-10 मार्ग शामिल है। इसके अलावा भारत-भूटान सीमा तक जाने वाला हासिमारा-जयगांव मार्ग, बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने वाला बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबंधा कॉरिडोर और सिलीगुड़ी-कुर्सियांग-दार्जिलिंग का पहाड़ी मार्ग भी इस सूची में शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल राज्य के भीतर सड़क संपर्क बेहतर होगा, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे भूटान और बांग्लादेश के साथ कनेक्टिविटी भी मजबूत होने की उम्मीद है। उत्तरी बंगाल, दुआर क्षेत्र और पहाड़ी इलाकों में परिवहन व्यवस्था में सुधार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है। इसके साथ ही मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में भी आवागमन सुगम होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा कार्यों को नई दिशा मिलेगी। केंद्रीय एजेंसियों की तकनीकी क्षमता और संसाधनों के साथ इन राजमार्गों का विकास अधिक तेजी और प्रभावशीलता के साथ किया जा सकेगा।

यह निर्णय राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एवं संपर्क व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी।

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