सिंधिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री के नेतृत्व में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और सोशल मीडिया पर चलने वाले ऐसे ट्रेंड्स का राजनीति की वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति का असली आधार जनता के बीच जाकर काम करना है, न कि इंटरनेट पर बनने वाले नैरेटिव।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक टिप्पणी के बाद ‘CJP’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर बढ़ी, लेकिन भाजपा का फोकस केवल विकास और जनसेवा पर है।
वहीं हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सोशल मीडिया और जमीनी राजनीति में बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार, कई ट्रेंड्स कुछ समय के लिए वायरल होते हैं लेकिन उनका असर स्थायी नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति केवल फॉलोअर्स या ऑनलाइन ट्रेंड्स से नहीं चलती, बल्कि जनता के बीच लगातार काम करने से चलती है।
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भाजपा, कांग्रेस या कोई भी बड़ा दल अपनी विचारधारा और संगठन के दम पर लंबे समय से सक्रिय हैं, इसलिए किसी भी नए सोशल मीडिया ट्रेंड की तुलना उनसे करना उचित नहीं है।
हालांकि, जब उनसे CJP के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया।
शिवपुरी में दिया गया यह बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा नेतृत्व सोशल मीडिया ट्रेंड्स को राजनीतिक वास्तविकता नहीं मानता और जमीनी राजनीति को ही असली ताकत बताता है।