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ग्लोबल फाइनेंस में डॉलर की बादशाहत को झटका, पुतिन का दावा- ब्रिक्स देशों की बढ़ती ताकत के आगे पस्त हो रहा पश्चिमी देशों का दबदबा

नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि दुनिया भर में अब डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक पश्चिमी मुद्राओं के प्रति अविश्वास तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे एकतरफा प्रतिबंधों, आर्थिक नाकेबंदी और अन्य देशों की वैध संपत्तियों को फ्रीज करने की नीतियों के कारण दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) गठबंधन के सदस्य देश अब अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की ओर रुख कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण आर्थिक सत्र के दौरान, जिसकी कमान भारतीय मीडिया जगत से जुड़ी वरिष्ठ पत्रकार के हाथों में थी, राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की बदलती दिशा का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की वित्तीय नीतियां बेहद अदूरदर्शी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, जो मध्य पूर्व से लेकर यूरोप तक अस्थिरता पैदा कर रही हैं। यूक्रेन विवाद के बाद रूस के राष्ट्रीय आरक्षित कोष (रिजर्व फंड) को फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को उन्होंने खुले तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय ‘चोरी’ करार दिया। पुतिन ने चेतावनी दी कि इस कदम ने वैश्विक बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों की निष्पक्षता पर एक ऐसा दाग लगा दिया है जिसे मिटाना अब मुमकिन नहीं है।

रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया का हर संप्रभु राष्ट्र अब यह भली-भांति समझ चुका है कि यदि वे पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक हितों के आड़े आते हैं, तो पलक झपकते ही उनकी भी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं और उन्हें वैश्विक भुगतान नेटवर्क से बाहर किया जा सकता है। इसी डर और असुरक्षा के माहौल ने वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों के विकास को गति दी है। वर्तमान में विभिन्न देश आपस में व्यापारिक लेन-देन के लिए अपनी स्थानीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही सेंट्रल बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) और डिजिटल वित्तीय संपत्तियों की भूमिका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बनती जा रही है।

रूस की अपनी आर्थिक स्थिति का उदाहरण देते हुए पुतिन ने बताया कि आज उनका देश अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ रूबल और अन्य राष्ट्रीय मुद्राओं में रिकॉर्ड स्तर पर व्यापार कर रहा है। रूस के कुल निर्यात व्यापार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा अब सीधे तौर पर उनकी अपनी मुद्रा रूबल में निष्पादित हो रहा है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया कि विकसित देशों का समूह यानी जी7 (G7) अब ब्रिक्स देशों के आर्थिक उभार के सामने लगातार अपनी चमक खोता जा रहा है।

आर्थिक विकास के वैश्विक आंकड़ों को साझा करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान वैश्विक जीडीपी विकास में अकेले ब्रिक्स देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा है, जबकि इसके मुकाबले जी7 देशों की हिस्सेदारी मात्र 18 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर देखें तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की हिस्सेदारी अब बढ़कर 40 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि जी7 देश अब 20 प्रतिशत से भी नीचे खिसक गए हैं। पुतिन ने अनुमान जताया कि आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों की आर्थिक विकास दर चार प्रतिशत से अधिक रहेगी, जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं बमुश्किल एक प्रतिशत की दर से आगे बढ़ पाएंगी।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के संबंध में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का केंद्र अब पूरी तरह से पूर्व और दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रहा है। ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’ और ‘ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट’ जैसे नए व्यापारिक रास्ते अब पश्चिमी नियंत्रण वाले पारंपरिक जलमार्गों और हब को पूरी तरह से दरकिनार कर रहे हैं। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर भी दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक पश्चिमी देशों को इन वैश्विक संस्थाओं से लाभ मिल रहा था, तब तक उन्होंने नियमों की दुहाई दी, लेकिन जैसे ही उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने लगी, वे खुद ही इन नियमों से पीछे हट गए हैं।

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