सुबह करीब 8 बजे समाज के लोग गौराबाई और पार्श्वनाथ मंदिर, कटरा नमकमंडी में एकत्र हुए। इसके बाद सफेद वस्त्रों में पुरुष और पीले-केसरिया वस्त्रों में महिलाएं शांतिपूर्वक कोतवाली थाने तक मौन जुलूस के रूप में पहुंचे। पूरे जुलूस के दौरान लोगों ने किसी नारेबाजी के बजाय गंभीरता और शांति के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
कोतवाली पहुंचकर सकल दिगंबर जैन समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर के नाम सिटी मजिस्ट्रेट गगन बिसेन और सीएसपी कश्यप को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सड़क दुर्घटना के दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के साथ-साथ इस घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।
समाज ने इस मौके पर यह भी कहा कि संतों और साध्वियों की सुरक्षा को लेकर अब ठोस और राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ज्ञापन में ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ लागू करने और इसे विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
इस आंदोलन का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Sagar जिले के बांदरी और जरुआखेड़ा जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिला, जहां जैन समाज ने मौन जुलूस निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
बांदरी में जुलूस के दौरान समाज के लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और थाने पहुंचकर अपनी मांगें रखीं। वहीं जरुआखेड़ा में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए पुलिस चौकी को ज्ञापन सौंपा गया।
समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।