Mahakaushal Times

योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट


लखनऊ।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) के तीसरे और आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के साथ ही बीजेपी (BJP) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पॉलिटिकल टोन सेट कर दिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लखनऊ के लोक भवन में 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन किया. जिन 6 नए मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से.

यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी नए प्रयोग के बजाय स्पष्ट तौर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति के तहत तैयार किया गया है. बीजेपी ने जातीय संतुलन साधने के लिए बेहद संतुलित और सोच-समझकर नए मंत्रियों के चुनाव किए हैं. पार्टी का फोकस ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाली अन्य जाति समुदायों पर रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके. यही कारण रहा कि मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देर रात तक बीजेपी नेताओं का मंथन और बैठकों का दौर चला।

इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्गों के प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया. भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की काट खोजने की कोशिश की है. मार्च 2022 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी 2.0 सरकार बनी थी, तब कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी।


कैबिनेट में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री

उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं।


सवर्ण समीकरण में ब्राह्मण और ठाकुर चेहरे अहम

यूपी कैबिनेट में 2022 में सवर्ण वर्ग से बनाए गए मंत्रियों में 7 ब्राह्मण, 8 ठाकुर, 3 वैश्य, 2 भूमिहार और 1 कायस्थ नेता शामिल थे. बीजेपी ने उस समय ब्राह्मण संतुलन साधने के लिए ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया था, जबकि जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. साल 2024 में योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया गया था, जिसमें 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया. इनमें 2 ओबीसी, 1 दलित और 1 ब्राह्मण नेता को जगह मिली थी।

उस दौरान समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, सपा से बीजेपी में वासपी करने वाले दारा सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से अनिल कुमार और साहिबाबाद से बीजेपी विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्री बनाया गया था. उस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई थी।


विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुईं सीटें

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद योगी सरकार के दो मंत्री जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि संसद पहुंच गए. दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए, जबकि दलित चेहरा अनूप वाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए. इन इस्तीफों के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 56 से घटकर 54 हो गई थी।

कैबिनेट में जितिन प्रसाद का रिप्लेसमेंट मनोज पांडे
जितिन प्रसाद के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या 8 से घटकर 7 रह गई थी. अब हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में काफी हद तक जितिन प्रसाद के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने दो साल बाद ही सही, लेकिन योगी कैबिनेट में फिर एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा शामिल कर सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने का संदेश दिया है।


मंत्रिमंडल विस्तार के केंद्र में है जातिगत समीकरण

मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए सदस्यों में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत और अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में पासी समुदाय से आने वाले फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता है।

हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. हंसराज 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं, कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. कृष्णा पासवान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. वह चार बार की विधायक हैं और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वह भाजपा की प्रमुख दलित महिला चेहरा मानी जाती हैं।


भूपेंद्र चौधरी करेंगे वेस्ट यूपी व जाटों का प्रतिनिधित्व

इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय तक संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं. चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे की वजह सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखना है।


दो मंत्रियों को प्रमोशन देने में छिपा है सियासी संदेश

सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को मिली जिम्मेदारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार बदलाव के साथ निरंतरता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है. सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक और ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री ​थे, सरकार में उनका कद बढ़ाकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर दिया गया है. इसी तरह कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री थे. उनका भी प्रमोशन करके राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर