कारोबार की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,000 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुरुआती बढ़त को स्थायी मजबूती का संकेत नहीं माना जा सकता।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के सामने ऊपरी स्तरों पर अब भी मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। यदि सूचकांक 24,000 के आसपास मजबूती के साथ टिककर कारोबार करता है और कुछ समय तक स्थिरता बनाए रखता है, तभी आगे की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी लगातार बना रह सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहने की संभावना है।
बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो महंगाई, कंपनियों के परिचालन खर्च और कॉर्पोरेट आय पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
गुरुवार के कारोबार में कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। चुनिंदा लार्जकैप कंपनियों में खरीदारी के कारण प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती मजबूती मिली। विशेष रूप से फार्मा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिससे इस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशक व्यापक खरीदारी के बजाय गुणवत्ता वाले और मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पहले की तुलना में सीमित बनी हुई है और अधिकांश निवेशक वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि हर बढ़त पर सीमित मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।
आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और घरेलू बाजार महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ निवेश की रणनीति अपनाई जा रही है और विशेषज्ञ भी चुनिंदा क्षेत्रों में संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं।