अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा कि कई बार रात देर तक काम करने के कारण नींद सामान्य समय पर नहीं आ पाती। उन्होंने यह भी साझा किया कि डॉक्टर अक्सर उन्हें पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद जरूरी होती है। इसके बावजूद उनका काम और जिम्मेदारियां उन्हें लगातार व्यस्त रखती हैं, जिससे उनका सोने का पैटर्न प्रभावित हो गया है।
उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए यह भी बताया कि रात के शांत समय में काम करना और विचारों में खोए रहना अब उनकी आदत बन चुकी है। जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब वे अपने काम और डिजिटल माध्यमों से जुड़े रहते हैं। इसी दौरान उन्हें संगीत सुनने का भी समय मिलता है, जिसे वे मानसिक शांति का सबसे बड़ा साधन मानते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से शास्त्रीय और वाद्य संगीत का जिक्र किया, जिसमें स्लाइड गिटार और सितार जैसी धुनें उन्हें गहरी शांति देती हैं। उनके अनुसार, यह संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मा को सुकून देने वाला अनुभव है, जो थकान और मानसिक दबाव को कम करने में मदद करता है।
अपने विचारों में उन्होंने संगीत को मानवता की एक साझा भाषा भी बताया। उनके अनुसार दुनिया के किसी भी कोने में जाएं, संगीत के सुर एक जैसे ही होते हैं और यही बात इसे सबसे अनोखा बनाती है। उनका मानना है कि संगीत न केवल भावनाओं को जोड़ता है बल्कि इंसान को भीतर से संतुलित भी रखता है।
काम के मोर्चे पर भी Amitabh Bachchan लगातार सक्रिय हैं। वे जल्द ही एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट के सीक्वल में नजर आने वाले हैं, जिसमें उनका किरदार फिर से दर्शकों के सामने आएगा। इस फिल्म ने पहले भाग में बड़ी सफलता हासिल की थी और अब इसके अगले अध्याय को लेकर भी काफी उत्साह देखा जा रहा है।
83 साल की उम्र में भी उनकी ऊर्जा और समर्पण यह दिखाते हैं कि उनके लिए अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है। हालांकि नींद और स्वास्थ्य को लेकर उनकी चिंता भी सामने आई है, लेकिन उनका काम के प्रति जुनून अभी भी पहले जैसा ही मजबूत है।
उनकी यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता की दिनचर्या नहीं, बल्कि उस समर्पण की झलक है जो उम्र के साथ भी कम नहीं होता। यह दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने जुनून और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।