सुप्रीम कोर्ट में दायर कई जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय में किसी तरह का संदेह न रहे। इन याचिकाओं को राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी अधिवक्ता अजय कुमार राय अधिवक्ता दिनेश कुमार यादव तथा हिन्दू धर्म परिषद की ओर से दायर किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने 123 वर्षों का लंबा संघर्ष देखा लेकिन अब मंदिर में आए दान और चढ़ावे को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि जांच के लिए गठित एसआईटी के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के प्रमाण नष्ट न हो सकें।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को तय कर दी है।
यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया था। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता के बाद इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। अब जांच रिपोर्ट और अगली सुनवाई यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अदालत का हर कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।