पत्रकारिता की आज़ादी या जिम्मेदारी? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बड़ा सवाल

लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि समाज में सच कितनी निर्भीकता से सामने आ पाता है। इसी संदर्भ में प्रेस को हमेशा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। इसकी भूमिका केवल खबरें देने तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता और समाज के बीच पारदर्शिता […]