ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ताइवान के साथ किसी भी सैन्य टकराव में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, क्योंकि यह अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर स्थित है। उनके इस बयान को ताइवान की सुरक्षा को लेकर नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे वहां चिंता बढ़ गई है।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि “बीजिंग को ताइवान पर कोई अधिकार नहीं है” और वह एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र राष्ट्र है। यह बयान ट्रंप की चेतावनी के बाद आया, जिसमें उन्होंने ताइवान को यह भी कहा कि वह अमेरिका के भरोसे अपनी स्वतंत्रता की घोषणा को और आगे न बढ़ाए।
इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में ताइवान मुद्दा सबसे बड़ा विवाद बिंदु रहा। चीन इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है, जबकि अमेरिका अब तक रणनीतिक अस्पष्टता की नीति अपनाता रहा है।
इसी बीच ताइवान को दिए जाने वाले 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप ने साफ कहा कि इस डील को लेकर उन्होंने अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी है और “यह आगे भी रद्द या मंजूर दोनों हो सकता है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका, चीन और ताइवान के बीच पहले से चल रहे तनाव को और अधिक जटिल बना दिया है।