Mahakaushal Times

विवाद के बाद नए अंदाज में लौट रहा टटीरी फिर से, बादशाह के गाने पर फिर टिकी सबकी नजर

नई दिल्ली:पंजाबी गायक बादशाह एक बार फिर अपने गाने टटीरी फिर से को लेकर सुर्खियों में हैं। पहले इस गाने को उसके कुछ विवादित लिरिक्स के कारण हटाना पड़ा था, लेकिन अब इसमें बदलाव के साथ इसे दोबारा रिलीज किया जा रहा है। गाने के नए संस्करण को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है, वहीं इसके सांस्कृतिक और पौराणिक संदर्भ भी चर्चा का विषय बन गए हैं।

टटीरी शब्द केवल एक गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। टटीरी एक छोटे पक्षी का नाम है, जो खुले मैदान में अंडे देने के लिए जाना जाता है। हरियाणा में इसे शुभता और खुशी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस पक्षी का जिक्र लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में भी बार बार देखने को मिलता है।

इस गाने को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब इसके कुछ शब्दों को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके बाद गाने को हटा दिया गया और उसमें आवश्यक बदलाव करने का निर्णय लिया गया। अब जब यह गाना नए रूप में सामने आ रहा है, तो यह केवल एक संगीत रिलीज नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक चर्चा का केंद्र भी बन गया है।

टटीरी का उल्लेख महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है, जो इस पूरे विषय को और अधिक दिलचस्प बना देता है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले इस पक्षी ने युद्धभूमि में अंडे दिए थे। इस दृश्य को देखकर पांडव चिंतित हो गए थे। तब अर्जुन ने उन अंडों की रक्षा करने का संकल्प लिया और अपना धनुष उनके पास रख दिया।

युद्ध के दौरान भीषण विनाश हुआ, लेकिन कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से टटीरी के अंडे सुरक्षित रहे। युद्ध समाप्त होने के बाद जब अर्जुन ने धनुष हटाया तो अंडे सुरक्षित पाए गए। यह प्रसंग इस बात को दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर अपने भक्तों और निर्दोष प्राणियों की रक्षा करते हैं।

हरियाणा की लोक परंपराओं में टटीरी का विशेष महत्व है। इसे केवल एक पक्षी नहीं बल्कि भावनाओं के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। कई लोकगीतों में टटीरी के माध्यम से महिलाओं की भावनाओं और इच्छाओं को अभिव्यक्त किया गया है, जिन्हें वे खुले रूप से व्यक्त नहीं कर पातीं। यही कारण है कि टटीरी से जुड़े गीत लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं।

बादशाह का यह गाना अब एक नए रूप में सामने आ रहा है, जिसमें मनोरंजन के साथ साथ सांस्कृतिक और पौराणिक संदर्भ भी जुड़ गए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इसे किस तरह से स्वीकार करते हैं और क्या यह पहले की तरह ही चर्चा का विषय बनता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर