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कुमार सानू का वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई सिंगर नहीं तोड़ पाया, जानिए आखिर क्यों एक ही दिन में रिकॉर्ड करने पड़े थे इतने सारे गाने

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में नव्वै का दशक एक ऐसा स्वर्णिम काल माना जाता है जिसने बॉलीवुड को कई सदाबहार और यादगार गाने दिए। इस दौर में अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज पाशर्व गायक कुमार सानू ने सफलता के कई नए आयाम स्थापित किए। आज के समय में जहां आधुनिक तकनीक के बावजूद सिंगर्स के लिए एक दिन में एक गाना पूरी तरह रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहीं कुमार सानू ने करीब तैंतीस साल पहले एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसे आज तक कोई भी छू नहीं सका है।
उन्होंने महज एक दिन के भीतर रिकॉर्ड अठाइस गाने गाकर अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में हमेशा के लिए दर्ज करा लिया था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह रिकॉर्ड किसी पुरस्कार या प्रसिद्धि की चाह में नहीं बनाया था, बल्कि इसके पीछे एक बेहद व्यावहारिक वजह थी। कुमार सानू को उन दिनों करीब चालीस दिनों के लंबे अमेरिकी दौरे पर जाना था और वह नहीं चाहते थे कि उनके विदेश जाने की वजह से किसी भी संगीतकार का काम रुके या फिल्म की शूटिंग प्रभावित हो, इसलिए उन्होंने जाने से पहले अपना सारा लंबित काम खत्म करने का फैसला किया और मैराथन रिकॉर्डिंग करते हुए यह अद्भुत मुकाम हासिल कर लिया।

कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे इस महान गायक का असली नाम सानू भट्टाचार्य है, लेकिन उनके संगीत के सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने जब पहली बार सानू की आवाज सुनी, तो उन्हें उसमें महान गायक किशोर कुमार की झलक दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने सानू भट्टाचार्य को अपना नाम बदलकर कुमार सानू रखने की सलाह दी ताकि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें एक नई पहचान मिल सके।

कुमार सानू के करियर को सबसे बड़ी उड़ान साल उन्नीस सौ नब्बे में आई फिल्म आशिकी से मिली। इस फिल्म के गानों ने भारतीय संगीत उद्योग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और इसकी ब्लॉकबस्टर कामयाबी ने कुमार सानू को रातों-रात देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार सिंगर बना दिया। इसके बाद तो जैसे हिंदी सिनेमा में उनके नाम की आंधी चल पड़ी और वह हर बड़े अभिनेता और निर्माता-निर्देशक की पहली पसंद बन गए।

कुमार सानू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल उन्नीस सौ इक्यानवे से लेकर उन्नीस सौ पंचानवे तक लगातार पांच सालों तक फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीतकर एक नया इतिहास रच दिया था। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान साजन, दीवाना, बाजीगर और नाइन्टीन फोर्टी टू ए लव स्टोरी जैसी सुपरहिट फिल्मों के गानों के लिए मिला था। कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद जब छठे साल भी उन्हें फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, तो उन्होंने अपनी दरियादिली और बड़प्पन का परिचय देते हुए इस अवॉर्ड को लेने से साफ मना कर दिया। उनका मानना था कि अब उन्हें लगातार मिलने वाले इस सम्मान की जगह किसी नए, प्रतिभावान और उभरते हुए कलाकार को मौका मिलना चाहिए ताकि फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरों को प्रोत्साहन मिल सके।

अपने पूरे करियर में कुमार सानू ने न सिर्फ हिंदी और अपनी मातृभाषा बंगाली में गाने गाए, बल्कि उन्होंने देश की पंद्रह से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों सुपरहिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। भारतीय संगीत जगत और संस्कृति में उनके इस बेमिसाल और अभूतपूर्व योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने साल दो हजार नौ में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। आज भी उनके गाए रोमांटिक गाने युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उनका यह सफर संगीत के नए साधकों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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