पीड़ित नितेश दवे ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर शेयर मार्केट निवेश से जुड़े कुछ विज्ञापन देखे थे, जिनमें कम समय में ज्यादा मुनाफे का दावा किया गया था। इसी विज्ञापन के जरिए उनकी बातचीत व्हाट्सएप पर एक महिला से शुरू हुई, जिसने खुद को आराध्या शर्मा बताया और एक बड़ी निवेश कंपनी से जुड़ा बताया।
आरोपी महिला ने उन्हें टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा, जहां “सीनियर अधिकारी” के रूप में हरीनी पटेल नाम की एक अन्य महिला से परिचय कराया गया। इसके बाद पीड़ित को एक ऑनलाइन एग्रीमेंट भी भेजा गया, जिसमें निवेश पर 15 प्रतिशत कमीशन का झांसा दिया गया।
शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने 10 हजार रुपये का निवेश करवाया, जिसके बदले में पीड़ित को करीब 13 हजार रुपये वापस भेजे गए। इससे उनका विश्वास बढ़ गया और वे लगातार निवेश करते चले गए।
इसके बाद “7 दिन के हाई रिटर्न प्लान” का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में कई ट्रांजेक्शन कराए गए। कुल मिलाकर 28 ट्रांजेक्शन के जरिए 17 लाख 84 हजार रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए गए।
जब पीड़ित ने अपना पैसा और मुनाफा वापस मांगना शुरू किया, तो आरोपी महिला ने संपर्क बंद कर दिया। कुछ ही समय में उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया और उसे टेलीग्राम ग्रुप से भी हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
घटना की शिकायत साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराने के बाद मामला एरोड्रम थाने तक पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात मोबाइल धारकों और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला हो सकता है।