भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन हाल के समय में इनमें स्थिरता बनी हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में संतुलन और घरेलू टैक्स संरचना का स्थिर रहना माना जा रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर रेट तय करती हैं, लेकिन फिलहाल बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं।
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले की तरह ही बनी हुई हैं। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई हैं। डीजल की कीमतें अधिकतर शहरों में अभी भी 100 रुपये के नीचे हैं।
महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर टैक्स और परिवहन लागत की वजह से देखने को मिलता है। कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि छोटे शहरों में यह दरें थोड़ी कम बनी हुई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव कम देखने को मिले हैं। टैक्स में बदलाव के बाद से कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और लॉजिस्टिक्स लागत शामिल हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी बदलाव का असर धीरे-धीरे घरेलू कीमतों पर पड़ता है।