जानकारी के अनुसार, इन रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, बारूदी सुरंगें लगाने और कुछ मामलों में सीमित हमले करने के लिए किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि युद्ध में मानव नुकसान को कम करने के लिए ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई जा रही है।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन की कुछ विशेष सैन्य इकाइयाँ, जैसे K-2 ब्रिगेड, पहले से ही इन UGV सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन और भारी गोलाबारी के कारण कई इलाकों को ‘नो-गो ज़ोन’ माना जा रहा है, जहां रोबोटिक सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में UGV मैदान में उतारे जाते हैं, तो यह युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी भी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।