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बिहार एनडीए में विलय की अटकलों पर उपेंद्र कुशवाहा का पूर्ण विराम: बोले- 'दुनिया की कोई ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकती'

नई दिल्ली । बिहार की क्षेत्रीय राजनीति और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के आंतरिक समीकरणों के बीच दलगत अस्तित्व को लेकर जारी कयासबाजियों पर आखिरकार राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपनी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय होने की तमाम संभावनाओं और मीडिया में चल रही अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को आयोजित अपनी पार्टी के एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक मंच से बोलते हुए उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का किसी अन्य दल में विलय होने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता।

पार्टी के प्रदेश सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गठबंधन की राजनीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे और उनकी पार्टी गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा से पालन करने वाले लोग हैं और एनडीए में शामिल सबसे बड़े राजनीतिक दल के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है। गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा पूरी मजबूती के साथ एनडीए का हिस्सा था, वर्तमान में भी है और भविष्य में भी बना रहेगा, इसलिए इस विषय को लेकर किसी के मन में कोई संदेह या संशय नहीं होना चाहिए।

मीडिया के एक वर्ग में पिछले कुछ महीनों से चल रही खबरों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कुशवाहा ने कहा कि कुछ चैनलों पर तो विलय की बाकायदा तारीखें तक घोषित कर दी गई थीं और इसे महज एक औपचारिकता बताया जा रहा था। इन दावों को पूरी तरह भ्रामक करार देते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वे शत-प्रतिशत इस बात को लेकर निश्चिंत रहें कि किसी एक राजनीतिक पद के लिए उनकी पार्टी का स्वतंत्र वजूद कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अस्तित्व को मिटा नहीं सकती है।

इस राजनीतिक बयानबाजी के पीछे बिहार की हालिया विधायी राजनीति को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। दरअसल, आगामी 18 जून को बिहार में होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की सूची घोषित की है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार के मौजूदा मंत्री दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है। टिकट न मिलने के कारण राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि कुशवाहा गुट एनडीए के शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहा है। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के उद्देश्य से उन्होंने भावुक संदेश देते हुए कहा कि वे एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक परिवार चलाते हैं, जिसका हिस्सा सभी कार्यकर्ता हैं।

संवैधानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दीपक प्रकाश के उम्मीदवारों की सूची में शामिल न होने से उनके मंत्री पद पर कानूनी संकट गहरा गया है। भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे किसी भी एक सदन का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य होता है। चूंकि दीपक प्रकाश वर्तमान में नीतीश कैबिनेट में मंत्री हैं और उन्हें आगामी चुनाव के लिए टिकट नहीं मिला है, इसलिए उनके राजनीतिक भविष्य और मंत्री पद पर बने रहने को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक हलचलें काफी तेज हो गई हैं।

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