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मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग


मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में कांग्रेस नेताओं, किसानों और व्यापारियों ने मिलकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

यह ज्ञापन ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा और जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण के नेतृत्व में मंडी सचिव जगदीशचंद्र भाभड़ को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी भी मौजूद रहे।

 किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मंडी शुल्क में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क उन पर और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई कृषि उत्पादक राज्यों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत या उससे भी कम है। ऐसे में मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ शुल्क व्यापारियों को अन्य राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे कर सकता है।

 किसानों और व्यापारियों में नाराजगी
किसान बंशीलाल पाटीदार ने इस फैसले को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है और इन परिस्थितियों में शुल्क वृद्धि किसानों की समस्याओं को और बढ़ाएगी। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय किसान और व्यापारी वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “शोषणकारी” कदम बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की।

आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेता बाबूखा मेवाती ने मंडी शुल्क वृद्धि को अन्यायपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।

 व्यापक समर्थन
इस मौके पर कई स्थानीय नेता, किसान और व्यापारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मंडी शुल्क वृद्धि का विरोध किया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि यह बढ़ोतरी लागू रहती है तो इसका सीधा असर उनकी आमदनी और व्यापार पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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