Mahakaushal Times

जब मुश्किलों में घिरा था परिवार, तब लोगों ने उड़ाया मजाक; त्रिशला दत्त ने सुनाया दर्दभरा किस्सा


नई दिल्ली । साल 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के दौरान संजय दत्त पर एके 56 राइफल और 9 एमएम पिस्टल समेत प्रतिबंधित हथियारों को रखने का आरोप लगा था। इसके लिए संजय दत्त को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। जब संजय दत्त इन परेशानियों से गुजर रहे थे, तब उनकी बेटी त्रिशला महज 5 साल की थीं। अब त्रिशला ने उस बुरे वक्त को याद करते हुए बताया कि कैसे उस वक्त उनका परिवार परेशानी झेल रहा था।

जब जेल गए थे संजय दत्त

इनसाइड थॉट्स आउट लाउड से खास बातचीत में 38 साल की त्रिशला ने बताया, “बहुत कम उम्र में ही उन्हें नशे की लत से जूझना पड़ा, उससे बाहर आना, फिर जेल जाना, वहां लगभग तीन साल रहना और फिर वहां से बाहर आना। मैं सोच भी नहीं सकती कि वो क्या महसूस कर रहे होंगे।”
त्रिशला बोलीं- कभी अपने पिता से किसी भी चीज के लिए नाराज नहीं हुई
त्रिशला ने इस बारे में भी बात की कि जब पूरा देश उनके परिवार के संघर्षों को देख रहा था, तब उस स्थिति से डील करना उनके लिए कितना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा, वो बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं उनसे बात नहीं कर पा रही थी क्योंकि वो किसी चीज से गुजर रहे थे, और अगर मैं उन्हें कॉल कर भी रही थी, उनके आसपास लोग होते थे।
उस वक्त उनसे इस बारे में बात करना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब दुनिया आपके परिवार को बिखरता हुआ देखती है, तो वो आसान नहीं होता है। मुझे लगता है बहुत सारे लोग मुझे इसलिए देखते थे कि मेरा रिएक्शन क्या होगा। मेरा रिएक्शन था कि मुझे अपने पिता के लिए स्ट्रॉन्ग बनना है। मैं कभी भी अपने पिता से गुस्सा नहीं हुई, किसी भी चीज के लिए।

मेरे पिता के खराब वक्त में लोग मना रहे थे जश्न

त्रिशला ने बताया कि कैसे बहुत से लोग उस वक्त उनके पिता के पतन का जश्न मना रहे थे। उन्होंने कहा, “मैंने सब देखा है। सब पढ़ा है। बहुत लोग जश्न मना रहे थे। वो वहां वापस जा रहे थे क्योंकि लोगों की अपनी राय थी।”
त्रिशला पर गर्व करते हैं संजय दत्त
त्रिशला ने इस बात को माना कि इतनी कम उम्र में इतना ट्रॉमा झेलने के बाद, उन्हें बुली भी किया गया। उन्होंने कहा कि उससे निकलने के लिए उन्हें सालों लग गए। त्रिशला ने कहा कि वो कह सकती हैं कि उनके पिता को आज उनमें बदलाव नजर आता है।
त्रिशला ने कहा कि कभी उनके पिता ने सीधेतौर पर तो ये नहीं कहा कि वो मुझमें बदलाव देख सकते हैं, लेकिन वो कहते हैं कि उन्हें मुझपर गर्व है। मुझे गर्व है कि तुम इतना आगे आ गई हो। बस ध्यान रखो कि अपने काम पर फोकस करो, अपना फोकस मत खो। वो कहते हैं कि अगर मुझे जरूरत है तो वो हमेशा मेरे साथ हैं।इतने संघर्षों के बीच त्रिशला ने जो अपने पिता से सीखा वो है जरूरतमंदों की मदद करना। अगर कोई मुसीबत में है, तो उसकी मदद करो। किसी को नीचा मत दिखाओ और कभी मत सोचो की आप दूसरों से बेहतर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर