चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इन हार्मोनल बदलावों का असर त्वचा पर भी पड़ता है। हार्मोन त्वचा की कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ाने के साथ रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे चेहरा अधिक ताजा, स्वस्थ और चमकदार दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि कई महिलाओं के चेहरे पर बिना किसी अतिरिक्त सौंदर्य प्रसाधन के भी प्राकृतिक निखार नजर आता है।
गर्भावस्था में शरीर में रक्त की मात्रा भी सामान्य से काफी अधिक हो जाती है ताकि मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। रक्त प्रवाह बढ़ने से चेहरे की महीन रक्त वाहिकाओं तक अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। इसके परिणामस्वरूप गालों पर हल्की गुलाबी आभा और त्वचा पर प्राकृतिक चमक दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञ इसे प्रेग्नेंसी ग्लो का एक प्रमुख कारण मानते हैं।
इस दौरान त्वचा की तेल ग्रंथियां भी अधिक सक्रिय हो सकती हैं। इससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिखाई देती है, लेकिन जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है, उनमें मुंहासे या पिंपल्स की समस्या भी बढ़ सकती है। इसलिए चेहरे पर मुंहासे होना भी गर्भावस्था के दौरान होने वाला सामान्य परिवर्तन माना जाता है और इसे किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं माना जाता, जब तक चिकित्सक अलग सलाह न दें।
जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, शरीर का तापमान और त्वचा में रक्त प्रवाह भी बढ़ सकता है। कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य से अधिक गर्मी महसूस होती है। इसका प्रभाव चेहरे पर हल्की लालिमा और ताजगी के रूप में दिखाई देता है। यह भी उन प्राकृतिक कारणों में शामिल है, जिनकी वजह से गर्भावस्था के दौरान त्वचा अधिक दमकती हुई नजर आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन भी त्वचा के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध, दही, अंडे और प्रोटीन से भरपूर भोजन शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज उपलब्ध कराते हैं। पर्याप्त जल सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रह सकती है।
हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर गर्भवती महिला में प्रेग्नेंसी ग्लो दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं है। कुछ महिलाओं को त्वचा पर पिग्मेंटेशन, रूखापन, मुंहासे या अन्य परिवर्तन भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी बदलाव को सामान्य शारीरिक प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए और त्वचा या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी गंभीर परेशानी होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।