गोल्डमैन सैक्स के एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-पैसिफिक इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो, अमोरिता गोयल और सुनील कौल द्वारा जारी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट के अनुसार जून 2027 तक निफ्टी 26,500 अंक के स्तर तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से करीब 10 प्रतिशत की संभावित बढ़त दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 की तुलना में अब बाजार को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है। उस समय उत्तर एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार कम आकर्षक माना जा रहा था और विदेशी निवेशकों की जल्द वापसी की उम्मीद भी नहीं थी। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट की तरह इस्तेमाल किया। इस दौरान महज साढ़े तीन महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की। लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से तस्वीर बदलने लगी और विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार बन गए। इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया।
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि वैश्विक फंडों की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी अभी भी सामान्य स्तर से कम है। ऐसे में उनके पास दोबारा निवेश बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि कंपनियों की आय में संशोधन और अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में मूल्यांकन निवेशकों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और मांग में मजबूती बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखेगी।
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून महीने में एफआईआई ने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जबकि जुलाई में अब तक 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे भारतीय बाजार की ओर लौट रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेश के रुझान और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।