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शी जिनपिंग-ट्रंप मुलाकात: G2 की चर्चा के बीच व्यापार और रणनीति पर टकराव, अमेरिका-चीन रिश्तों में नई खींचतान



नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे को लेकर वैश्विक राजनीति में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने इस यात्रा को व्यापारिक सफलता बताया और दावा किया कि चीन ने अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीदारी पर सहमति जताई है, लेकिन बीजिंग ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद फिर उजागर हो गए हैं।

ट्रंप ने कहा कि चीन ने अमेरिका से 200 बोइंग विमान खरीदने और अरबों डॉलर के बीफ व सोयाबीन आयात पर सहमति दी है। हालांकि चीन की ओर से इस पर कोई औपचारिक पुष्टि नहीं आई, जिससे यह दावा विवादों में आ गया है। इसी बीच ट्रंप के साथ गए अमेरिकी बिजनेस डेलिगेशन को भी ठोस व्यापारिक समझौते के बिना लौटना पड़ा।

दूसरी ओर चीन ने इस मुलाकात को कूटनीतिक रूप से बेहद सोच-समझकर आयोजित किया, जहां सैन्य प्रदर्शन, औपचारिक स्वागत और शी जिनपिंग के साथ निजी मुलाकातों के जरिए अपनी वैश्विक शक्ति का संदेश देने की कोशिश की गई। विश्लेषकों के मुताबिक, इस पूरे दौरे में चीन का आत्मविश्वास और रणनीतिक स्थिति मजबूत नजर आई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच चर्चा के केंद्र में तीन ‘B’ (Boeing, Beef, Beans) और तीन ‘T’ (Taiwan, Tariff, Technology) रहे। ट्रंप प्रशासन ने ताइवान मुद्दे पर नरम रुख दिखाया, जबकि चीन ने तकनीक और व्यापार नीति पर सख्त रुख बनाए रखा। इसी दौरान अमेरिका द्वारा हथियार आपूर्ति में देरी जैसी खबरों ने भी रणनीतिक संतुलन पर असर डाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन फिलहाल अमेरिका के साथ “G2 व्यवस्था” यानी वैश्विक शक्ति साझेदारी की अवधारणा को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि दुनिया की नीतियों में उसकी बराबर की भागीदारी हो सके। हालांकि दीर्घकाल में उसका लक्ष्य वैश्विक नेतृत्व हासिल करना बताया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच झूल रहे हैं, और आने वाले समय में यह वैश्विक शक्ति संतुलन को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं।

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