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एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल


नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऐसा का रनामा कर दिखाया जिसे भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक याद रखेगा। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र महिला टेस्ट मैच में यास्तिका ने शानदार 113 रन की पारी खेलते हुए न केवल भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बन गईं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि वह करीब एक साल तक चोट के कारण क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर लौटी थीं।

यास्तिका की यह पारी केवल एक शतक नहीं बल्कि संघर्ष धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई। लंबे समय तक चोट से जूझने के कारण उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। घरेलू वनडे विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग जैसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने का दर्द उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में कई बार उन्हें लगा कि इतनी बड़ी उपलब्धि शायद अब कभी हासिल नहीं हो पाएगी।

उन्होंने बताया कि चोट के दौरान पुनर्वास का समय मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन परिवार टीम प्रबंधन और सहयोगी खिलाड़ियों ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यही भरोसा उन्हें दोबारा मैदान तक लेकर आया। उन्होंने कहा कि यदि छह महीने पहले कोई उनसे कहता कि उनका नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज होगा तो शायद वह खुद भी इस बात पर विश्वास नहीं करतीं। आज यह सपना सच होने जैसा महसूस हो रहा है।

यास्तिका ने अपनी ऐतिहासिक पारी के बाद भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि शतक पूरा होने के बाद उन्होंने जश्न मनाने की अलग योजना बनाई थी लेकिन उस पल भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि उन्होंने सिर्फ भारतीय तिरंगे को चूमकर अपनी खुशी जाहिर की। उनके लिए यह सबसे बड़ा सम्मान था कि वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इतिहास का हिस्सा बनीं।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों के सामने पिछले एक साल का पूरा संघर्ष घूम गया। परिवार की यादें कठिन दौर की चुनौतियां और मैदान पर वापसी की मेहनत सब कुछ एक साथ याद आने लगा। वह पल इतना भावुक था कि खुद को संभालना भी मुश्किल हो गया। उनके अनुसार यह उनके क्रिकेट जीवन का सबसे खास क्षण है।

यास्तिका ने स्पष्ट किया कि उनका सपना केवल इस शतक तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य टीम को विश्व कप जिताना है और देश के लिए लगातार यादगार प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय जर्सी पहनकर खेलने से बड़ा सम्मान कोई नहीं हो सकता और वह आने वाले वर्षों में टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं।

भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाकर यास्तिका ने न केवल नया इतिहास रचा बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला क्रिकेटरों के लिए भी नई प्रेरणा तैयार की है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल करने की उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत धैर्य और विश्वास के दम पर हर सपना पूरा किया जा सकता है।

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