पीड़ित राहुल गिरी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि फरवरी महीने में उन्हें पैसों की तत्काल जरूरत थी। इसी दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लोन एप का विज्ञापन देखा, जिसमें आसान लोन उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्होंने एप डाउनलोड कर लिया और अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक डिटेल्स साझा कर दी।
जानकारी देने के कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते में लगभग 4 हजार रुपए का लोन ट्रांसफर कर दिया गया। शुरुआत में यह प्रक्रिया सामान्य लगी, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला पूरी तरह बदल गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों और वॉट्सएप अकाउंट से उन्हें लगातार कॉल और मैसेज आने लगे।
आरोपियों ने लोन की रकम को कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब राहुल ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया कि उनके मोबाइल से ली गई तस्वीरें और डाटा उनके पास मौजूद हैं। आरोपियों ने डराने के लिए कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो इन तस्वीरों को एडिट कर उनके रिश्तेदारों और परिचितों को भेज दिया जाएगा।
डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने आरोपियों द्वारा दिए गए यूपीआई अकाउंट्स में धीरे-धीरे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद ठगों की मांग खत्म नहीं हुई और वे लगातार और पैसे की मांग करते रहे।
इसके बाद आरोपियों ने धमकी और तेज कर दी और पीड़ित के एडिट किए गए फोटो उसके रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों को भेज दिए। इस घटना से परेशान होकर राहुल ने अपना मोबाइल भी फॉर्मेट कर दिया, लेकिन तब तक वह पूरी तरह से साइबर जाल में फंस चुका था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने पहले साइबर क्राइम यूनिट में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को ट्रांसफर किया गया, जहां अब एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस को पीड़ित ने आधा दर्जन से अधिक यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी सौंपे हैं, जिनका उपयोग ठगी में किया गया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साइबर गिरोह के पीछे कौन लोग हैं और यह नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है। शुरुआती जांच में यह मामला संगठित ऑनलाइन लोन फ्रॉड और ब्लैकमेलिंग गिरोह से जुड़ा माना जा रहा है।