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धार्मिक मंच से सामाजिक संदेश, बारिश का पानी जमीन में उतारने पर जोर


नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से बकरीद के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को एकता, भाईचारे और जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठाई, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई।

शहर काजी ने अपने संबोधन में कहा कि गाय को देश की दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे, ताकि उसके संरक्षण को और मजबूती मिल सके तथा उसके वध पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

उन्होंने कहा कि समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक भावनाओं की कद्र करना ही असली इंसानियत है। काजी की इस अपील पर ईदगाह में मौजूद नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया। इस दौरान माहौल भाईचारे और सौहार्द के संदेश से भरा नजर आया।

शहर काजी ने पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर भी लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे रहने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मोहल्लों में जल संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की।

अपने संबोधन में उन्होंने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। काजी इशरत अली ने साफ शब्दों में कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशे के कारोबार में शामिल हैं और यह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है और इससे युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। उन्होंने महिलाओं के भी इस अवैध धंधे में शामिल होने पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे के खिलाफ आवाज सबसे पहले उन्होंने उठाई थी और लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की भी सराहना की।

इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले करीब 50 वर्षों से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करने वाली परंपरा निभाई जा रही है। ईद के दिन शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी एक हिंदू परिवार निभाता है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने इस परंपरा को निभाया। उन्होंने शहर काजी का फूलमालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया।

वहीं प्रशासन और पुलिस ने भी त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात रहा।

इधर खंडवा में भी बकरीद के मौके पर शहर काजी सैयद निसार अली ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी से बचता रहा है। साथ ही गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई।

बकरीद के मौके पर इंदौर और खंडवा से आया यह संदेश सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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