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13 हजार मीट्रिक टन क्षमता बेकार: स्थानीय गोदाम खाली, 50 किमी दूर से सप्लाई जारी


नई दिल्ली। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे गेहूं के भंडारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर करीब 13 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले वेयरहाउस खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों की उपज को 50 किलोमीटर दूर ब्यावरा भेजा जा रहा है। इस फैसले से न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि शासन पर अतिरिक्त परिवहन खर्च का बोझ भी बढ़ रहा है।

खिलचीपुर क्षेत्र के छापीहेड़ा, माचलपुर, कोडक्या और भाटखेड़ा उपार्जन केंद्रों पर किसानों से गेहूं की खरीद जारी है। नियमों के अनुसार, खरीदी गई उपज को पहले नजदीकी वेयरहाउस में सुरक्षित किया जाना चाहिए ताकि परिवहन लागत कम रहे और भंडारण व्यवस्था सुचारू बनी रहे। लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। क्षेत्र के श्री गणेश किसान केंद्र बड़बेली और शिवहरे वेयरहाउस बड़बेली में पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद अधिकांश स्टॉक ब्यावरा भेजा जा रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि यह व्यवस्था तकनीकी से ज्यादा “मैपिंग और निर्णय प्रक्रिया” की खामियों का नतीजा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि लंबी दूरी के परिवहन से ठेकेदारों को अधिक भुगतान और कमीशन का लाभ मिलता है, जिससे जानबूझकर गेहूं दूर भेजे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वहीं, मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के खिलचीपुर-छापीहेड़ा शाखा प्रबंधक वसंत देवड़े ने स्वीकार किया है कि स्थानीय गोदाम खाली हैं। उनके अनुसार, “उपार्जन समितियों द्वारा जिस वेयरहाउस की मैपिंग की जाती है, उसी के अनुसार गेहूं भेजा जाता है।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि नियमानुसार पहले नजदीकी वेयरहाउस का उपयोग होना चाहिए और इस संबंध में सुधार के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखा गया है।

फिलहाल इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और परिवहन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और आम लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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