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रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर


मध्यप्रदेश। रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत देवखर (कोरियान टोला) से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार मासूम बच्चे ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। इस बीमारी के कारण सूरज की रोशनी उनके लिए राहत नहीं बल्कि सजा बन गई है।

सुग्रीव कोरी के परिवार के चार बच्चे अनामिका (5 वर्ष), रिया (9 वर्ष), प्रियांशु (13 वर्ष) और पुष्पेंद्र (10 वर्ष)—जन्म से ही एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एल्बिनिज्म से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में मेलानिन नामक तत्व नहीं बन पाता, जिसके कारण बच्चों की त्वचा, बाल और आंखों का रंग पूरी तरह सफेद है और उनकी दृष्टि भी बेहद कमजोर है।

इन बच्चों की हालत इतनी गंभीर है कि तेज धूप या रोशनी में उनकी आंखों में तेज जलन और चुभन होती है। बाहर निकलते ही उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और संतुलन बिगड़ने से वे गिर जाते हैं। यही कारण है कि ये मासूम बच्चे अधिकांश समय अंधेरे कमरों में रहने को मजबूर हैं।

सबसे दुखद पहलू यह है कि उनकी शारीरिक स्थिति के कारण उन्हें समाज में भी उपहास का सामना करना पड़ता है। गांव के कुछ लोग और बच्चे उन्हें ‘अंग्रेज’ कहकर चिढ़ाते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से और अधिक आहत हो गए हैं। धीरे-धीरे उन्होंने घर से बाहर निकलना भी कम कर दिया है।

परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। माता-पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे हैं। ऐसे में बच्चों का इलाज बड़े अस्पतालों में कराना उनके लिए संभव नहीं है। मां माया कोरी और मंजू कोरी ने भावुक होकर बताया कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन धुंधली दृष्टि के कारण उन्हें अक्षर भी स्पष्ट दिखाई नहीं देते।

इस बीच एक और गंभीर समस्या सामने आई है कि बच्चों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन मशीन में मैच नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनका सरकारी राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण परिवार को सरकारी राशन और योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

इसके अलावा अब तक बच्चों का दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन सका है, जिससे वे पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सहायता से वंचित हैं। यह स्थिति परिवार की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आनुवंशिक बीमारी का प्रतीत होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच कराकर उचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य टीम को गांव भेजने और आवश्यक सहायता देने की बात कही है। यह कहानी न केवल एक चिकित्सा चुनौती को दर्शाती है, बल्कि समाज और सिस्टम की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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