अभय देओल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने किसी विस्तृत टिप्पणी के बजाय टूटे हुए दिल का प्रतीक साझा कर उनकी बिगड़ती सेहत पर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके साथ उन्होंने फिल्म 3 Idiots के चर्चित गीत का भी उल्लेख किया, जिसे कई लोगों ने सोनम वांगचुक से जुड़ी प्रेरणा की ओर संकेत के रूप में देखा। अभय देओल की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई।
इससे पहले अभिनेत्री जीनत अमान ने भी एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए सरकार से वांगचुक की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य करते रहे हैं और उनके योगदान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है और वजन में भी उल्लेखनीय कमी आई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया जा रहा है। बढ़ती चिंता के बीच उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने तथा संबंधित मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी इन मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इस प्रस्तावित मार्च को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सोनम वांगचुक की सेहत, उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन की दिशा पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा लगातार राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी संभावित संवाद की संभावना पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।