Singhastha 2028 Update: उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ-2028 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को भव्य, दिव्य और आधुनिक स्वरूप देने के लिए प्रदेश सरकार तेजी से तैयारियां कर रही है।
उन्होंने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा का सबसे बड़ा महापर्व है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सिंहस्थ-2028 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए उज्जैन में विकास कार्य निरंतर जारी हैं : CM@DrMohanYadav51 #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh pic.twitter.com/Npo30GfwnH
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) June 27, 2026
40 करोड़ श्रद्धालुओं के हिसाब से बन रही योजना
उज्जैन में आयोजित ‘सिंहस्थ 2016 के अनुभव- 2028 का संकल्प’ कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। जिसके चलते प्रमुख स्नान पर्वों पर एक दिन में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु शिप्रा नदी में अमृत स्नान कर सकेंगे।
इसी को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
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25 हजार करोड़ के विकास कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 853.46 करोड़ रुपये की लागत से शिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा उज्जैन और आसपास के जिलों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़क, पेयजल, बिजली, यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं।
‘स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ’ पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प ‘स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ’ है। श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण, बेहतर यातायात, सुरक्षित स्नान घाट और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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2016 के अनुभवों से मिलेगा 2028 को नया स्वरूप
कार्यशाला के दौरान सिंहस्थ-2028 से जुड़े अधोसंरचना विकास कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सिंहस्थ-2016 के अनुभवों का लाभ उठाते हुए वर्ष 2028 के आयोजन को पहले से अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और विश्वस्तरीय बनाने का आह्वान किया।