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सुरक्षाकर्मियों की कुल आय का बड़ा हिस्सा उनके निश्चित वेतन के अलावा फिल्म निर्माण और विज्ञापनों के विशेष अनुबंधों से प्राप्त होता है।


नई दिल्ली: भारतीय फिल्म जगत के सबसे बड़े सितारों के साथ साये की तरह रहने वाले उनके सुरक्षाकर्मियों की आय हमेशा से ही जिज्ञासा का विषय रही है। सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में अक्सर यह दावा किया जाता रहा है कि इन सितारों के बॉडीगार्ड्स को वार्षिक दो से ढाई करोड़ रुपये का वेतन मिलता है। हालांकि, लंबे समय तक एक महानायक की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले उनके पूर्व सुरक्षा प्रमुख ने हाल ही में इन आंकड़ों को पूरी तरह से भ्रामक और वास्तविकता से परे बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की कमाई को लेकर समाज में एक गलत धारणा बनी हुई है, जबकि हकीकत इन दावों से कोसों दूर है।

मासिक वेतन और सोशल मीडिया का भ्रम
पूर्व सुरक्षा प्रमुख के अनुसार, किसी भी बड़े सुपरस्टार के साथ काम करने वाले सुरक्षाकर्मी की एक निश्चित मासिक आय होती है। उन्होंने उन दावों पर कड़ा ऐतराज जताया जिनमें कहा जाता है कि ये गार्ड हर महीने 8 से 10 लाख रुपये कमाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पेशेवर दुनिया में भुगतान का तरीका पूरी तरह से पारदर्शी और तार्किक होता है। उनके मुताबिक, एक अनुभवी और उच्च श्रेणी के बॉडीगार्ड की अधिकतम मासिक सैलरी एक लाख रुपये के आसपास हो सकती है। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले करोड़ों के आंकड़े केवल सुर्खियां बटोरने का जरिया हैं, लेकिन धरातल पर भुगतान की स्थिति काफी संतुलित होती है।

फिल्म निर्माण और अतिरिक्त आय का अनुबंध
वेतन के दावों पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने इस पेशे में होने वाली अतिरिक्त कमाई के सही स्रोत के बारे में भी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि सितारों के साथ रहने के दौरान जो अतिरिक्त आय होती है, वह मुख्य रूप से फिल्म प्रोजेक्ट्स और विज्ञापनों से जुड़ी होती है। जब भी कोई कलाकार किसी नई फिल्म की शूटिंग शुरू करता है, तो उसके निजी स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अलग अनुबंध तैयार किया जाता है। फिल्म के निर्माता उस विशेष कार्य के लिए एक तय राशि का भुगतान करते हैं। यह राशि हर फिल्म की अवधि और प्रोडक्शन की क्षमता के अनुसार अलग-अलग होती है, जिसे वार्षिक पैकेज का हिस्सा नहीं बल्कि ‘प्रोजेक्ट आधारित आय’ माना जाता है।

बदलता दौर और सुरक्षाकर्मियों के अधिकार

उन्होंने उस संघर्षपूर्ण समय को भी याद किया जब मनोरंजन जगत में सुरक्षा गार्डों को फिल्म के क्रू का हिस्सा नहीं माना जाता था। पहले केवल तकनीकी टीम और अन्य सहायकों को ही निर्माताओं द्वारा भुगतान किया जाता था। सुरक्षाकर्मियों के अधिकारों की वकालत करते हुए उन्होंने तर्क दिया था कि सुरक्षा व्यवस्था भी फिल्म निर्माण की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है और इसमें शामिल लोगों के श्रम का उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उनकी इसी पहल और बड़े सितारों के सहयोग से धीरे-धीरे नियमों में बदलाव आया और आज फिल्म निर्माताओं ने सुरक्षाकर्मियों को भी प्रोजेक्ट्स के दौरान भुगतान करना अनिवार्य कर दिया है।

अनुभव से उद्यमिता तक का सफर
एक दशक से अधिक समय तक सितारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद, अब वह अपनी खुद की निजी सुरक्षा एजेंसी का सफल संचालन कर रहे हैं। उनकी एजेंसी आज खेल जगत की दिग्गज हस्तियों और हाई-प्रोफाइल आयोजनों को विश्वस्तरीय सुरक्षा सेवाएं प्रदान कर रही है। उनका मानना है कि इस पेशे में केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि गोपनीयता और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सुरक्षा का क्षेत्र सम्मान और जिम्मेदारी का है, जिसे केवल धन के चश्मे से देखना गलत होगा। सच्चाई यह है कि यह पेशा कड़ी मेहनत और समर्पण की मांग करता है, न कि केवल कागजों पर दिखने वाले भारी-भरकम वेतन की।

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