BRICS सम्मेलन में भारत की पहल: 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' से जुड़ेंगे वैश्विक रचनाकार, AI तकनीक से होगी चोरी हुई धरोहरों की तलाश
BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 में भारत ने 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' की घोषणा की है। साथ ही AI तकनीक के जरिए चोरी हुई ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान और वापसी पर सहमति बनी है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चार दिवसीय BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 के समापन अवसर पर भारत ने एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहल की घोषणा की है। BRICS संस्कृति ट्रैक के तहत भारत द्वारा 'स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री' (Voluntary Artist Registry) तैयार करने की पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य BRICS सदस्य देशों के कलाकारों, साहित्यकारों और रचनाकारों को एक साझा मंच पर लाकर उनके बीच पेशेवर नेटवर्किंग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह घोषणा सम्मेलन के अंतिम दिन आयोजित संस्कृति मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई, जिसमें सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए 'भोपाल घोषणा' पत्र का हिस्सा बनाया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी अवैध संपदाओं की पहचान
भोपाल घोषणा पत्र में विदेशों में मौजूद चोरी या अवैध रूप से भेजी गई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपदाओं की मूल देश में सुरक्षित वापसी के लिए ठोस रणनीति बनाई गई है। इसके तहत ऐतिहासिक धरोहरों के मूल उद्गम स्थलों की पहचान और अनुसंधान को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग करने पर सहमति बनी है, ताकि वैश्विक स्तर पर अवैध रूप से पहुंचाई गई धरोहरों की त्वरित पहचान की जा सके।
कलाकारों के अधिकार और AI कॉपीराइट पर वैश्विक सहमति
सम्मेलन के दौरान रचनात्मक उद्योग और 'क्रिएटिव इकोनॉमी' को बढ़ावा देने पर गहन मंथन हुआ। घोषणा पत्र में AI सिस्टम के प्रशिक्षण और संचालन में कॉपीराइट युक्त कलात्मक रचनाओं के इस्तेमाल को लेकर पूर्ण पारदर्शिता बरतने तथा रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक देने की बात कही गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कलाकारों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा मजबूत होगी।
डिजिटल तकनीक और संग्रहालयों के बीच साझा रोडमैप
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि यह BRICS संस्कृति ट्रैक की 11वीं बैठक थी, जिसमें पहली बार सांस्कृतिक सहयोग के लिए स्पष्ट और समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस साझा रोडमैप में लोक कला, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को सहेजने के साथ-साथ दस्तावेजों के डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है। इसके लिए संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच आपसी विशेषज्ञता साझा की जाएगी। 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' पर केंद्रित इस सम्मेलन में 11 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुआ संस्कृति ट्रैक
भारत की अध्यक्षता में संचालित इस BRICS संस्कृति ट्रैक की शुरुआत अप्रैल में ऑनलाइन बैठक से हुई थी। इसके बाद जून में वाराणसी में और अगस्त की शुरुआत में भोपाल में कार्य समूह की बैठकें आयोजित की गईं। अंततः 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में भोपाल घोषणा को अंतिम रूप दिया गया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी संपन्न हुईं।
14 देशों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
इस मंत्री स्तरीय बैठक में कुल 14 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 10 BRICS सदस्य देश और 4 साझेदार देश शामिल रहे:
- सदस्य देश: भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र (ऑनलाइन भागीदारी), इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात।
- साझेदार देश: बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड।
सांची की बौद्ध विरासत और प्रागैतिहासिक भीमबेटका का अनुभव
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक एवं स्थापत्य कला से परिचित कराने के लिए सांची स्तूप का गाइडेड टूर आयोजित किया गया। अतिथियों ने चेतियागिरी मंदिर में दर्शन किए तथा योग और ध्यान सत्रों में भाग लिया। शाम के समय बौद्ध इतिहास पर केंद्रित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग व लाइट एंड साउंड शो का प्रदर्शन किया गया। प्रतिनिधियों की प्रस्थान से पूर्व प्रागैतिहासिक शैल कला के लिए प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण भी निर्धारित किया गया है।
मिलेट आधारित पारंपरिक व्यंजनों से स्वागत
सम्मेलन में शामिल विदेशी मेहमानों के लिए मध्य प्रदेश की खानपान संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए विशेष व्यंजन परोसे गए। मेज़बानी के दौरान दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और कोदो-कुटकी जैसे पारंपरिक मिलेट पकवानों के साथ-साथ वेस्टर्न व ओरिएंटल व्यंजन भी प्रस्तुत किए गए।
