Narsinghpur News : दिवंगत शिक्षक को भेजा ई-अटेंडेंस नोटिस, शिक्षा विभाग के डिजिटल सिस्टम की फिर खुली पोल
Narsinghpur News : नोटिस में ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने का कारण पूछा गया और समय पर जवाब नहीं देने पर वेतन कटौती तथा विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
Narsinghpur News : मध्य प्रदेश। नरसिंहपुर में शिक्षा विभाग के ई-अटेंडेंस सिस्टम की तकनीकी खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। विभाग द्वारा ई-अटेंडेंस पोर्टल को तीन बार अपग्रेड किए जाने के बावजूद सिस्टम की त्रुटियां पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं। ताजा मामला करेली विकासखंड का है, जहां करीब सात महीने पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक के नाम ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने का नोटिस जारी कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दिवंगत शिक्षक के नाम जारी हुआ विभागीय नोटिस
जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा विभाग ने 11 जुलाई को करेली ब्लॉक की प्राथमिक शाला रितुआ टोला में पदस्थ बताए गए जोगेंद्र किशोर दिलवाइड के नाम नोटिस जारी किया। नोटिस में ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने का कारण पूछा गया और समय पर जवाब नहीं देने पर वेतन कटौती तथा विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
यह नोटिस विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने इस पर सवाल उठाए और रिकॉर्ड की सत्यता पर चिंता जताई।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
मामले की जांच के दौरान पता चला कि प्राथमिक शाला रितुआ टोला में इस नाम का कोई शिक्षक वर्तमान में पदस्थ ही नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि जोगेंद्र किशोर त्रिवेदी नामक शिक्षक का 28 दिसंबर 2025 को निधन हो चुका है।
नाम में समानता और पोर्टल पर पुरानी जानकारी अपडेट नहीं होने के कारण यह गंभीर तकनीकी गलती हुई। मृत शिक्षक के नाम से नोटिस जारी होने के बाद विभाग के डिजिटल डेटा प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नोटिस में दी गई थी कार्रवाई और वेतन कटौती की चेतावनी
जारी किए गए नोटिस में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल और संयुक्त संचालक लोक शिक्षण जबलपुर के निर्देशों का हवाला दिया गया था। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि ई-अटेंडेंस नियमित रूप से दर्ज नहीं की जाती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है और वेतन कटौती भी की जाएगी।
साथ ही संबंधित शिक्षक से तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शिक्षक का कई महीने पहले ही निधन हो चुका है।
शिक्षकों ने डेटा अपडेट करने की मांग उठाई
इस घटना के बाद शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के डिजिटल सिस्टम को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि पोर्टल पर मृत, स्थानांतरित या सेवानिवृत्त कर्मचारियों का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किया जाएगा, तो भविष्य में भी इस तरह की गलतियां सामने आती रहेंगी।
शिक्षकों का मानना है कि ऐसी तकनीकी त्रुटियों के कारण निर्दोष कर्मचारियों को अनावश्यक नोटिस मिल सकते हैं और उन्हें मानसिक परेशानी के साथ विभागीय प्रक्रिया का सामना भी करना पड़ सकता है।
डीईओ ने जांच और सुधार का दिया भरोसा
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार कुशवाहा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ई-अटेंडेंस से जुड़ी जानकारी के सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य की होती है।
उन्होंने संभावना जताई कि पोर्टल से पुराना डेटा हटाया नहीं गया, जिसके कारण यह तकनीकी त्रुटि हुई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और पोर्टल पर दर्ज जानकारी को सही कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
