Jabalpur Cyber Crime : जबलपुर में बुजुर्ग दंपती 12 दिन डिजिटल अरेस्ट, CBI अधिकारी बनकर ठगों ने ठगे 22 लाख
Jabalpur Cyber Crime : अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के मुताबिक ठग करीब हर दो घंटे में दंपती से पूछताछ करते थे। वीडियो कॉल के जरिए उनकी निगरानी भी की जाती थी।
Jabalpur Cyber Crime : मध्य प्रदेश। जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने 75 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को CBI अधिकारी बनकर करीब 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के कारोबार में फंसाने की धमकी दी। कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर उनकी FD में जमा 22 लाख रुपए अपने बताए खाते में ट्रांसफर करा लिए।
वॉट्सऐप कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला
डिफेंस कॉलोनी निवासी प्रकाश पाल शेजवाल प्राइवेट कंपनी से रिटायर्ड हैं। 22 जुलाई को उनके मोबाइल पर वॉट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को CBI अधिकारी बताया और दावा किया कि प्रकाश और उनका परिवार मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा है। आरोपी ने गिरफ्तारी की धमकी दी। डर के कारण प्रकाश ने कॉल काट दिया। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से लगातार फोन आने लगे।
फर्जी CBI नोटिस भेजकर बढ़ाया डर
जब प्रकाश ने फोन उठाना बंद किया तो ठगों ने वॉट्सऐप पर CBI के नाम और लोगो वाला कथित नोटिस भेज दिया। दस्तावेज देखकर उन्हें लगा कि मामला वास्तव में सरकारी जांच से जुड़ा है। इसके बाद वह आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे। ठगों ने खुद को जांच अधिकारी बताकर दंपती से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाते रहे।
घर से निकलने और परिवार से बात करने पर रोक
23 जुलाई को एक आरोपी ने खुद का नाम प्रशांत सिंह बताया। उसने पहले परिवार के सदस्यों और फिर बैंक खातों की जानकारी मांगी। इसके बाद दंपती को घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देश दिया गया। ठगों ने बच्चों और रिश्तेदारों से बात करने पर भी रोक लगा दी। उन्हें यह भी बताया गया कि उनकी हर गतिविधि कैमरे से रिकॉर्ड की जा रही है। डर के कारण दंपती ने किसी परिजन से संपर्क नहीं किया।
हर दो घंटे में पूछताछ और वीडियो कॉल से निगरानी
अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के मुताबिक ठग करीब हर दो घंटे में दंपती से पूछताछ करते थे। वीडियो कॉल के जरिए उनकी निगरानी भी की जाती थी। प्रकाश की बेटी मध्य प्रदेश से बाहर रहती हैं और जबलपुर में भी उनके रिश्तेदार हैं। इसके बावजूद ठगों के डर के कारण दंपती किसी से मदद नहीं मांग सके। करीब 12 दिन तक वे आरोपियों के दबाव में रहे।
22 लाख की FD खाते में ट्रांसफर कराई
ठगों ने दंपती को बताया कि उनकी FD में जमा रकम की जांच की जानी है। उन्होंने 22 लाख रुपए जितेंद्र कुमार राणा के खाते में ट्रांसफर करने को कहा। आरोपियों ने दावा किया कि जितेंद्र भी अपराध में शामिल है और उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके खाते में रकम भेजना जरूरी है। उन्होंने रकम वापस करने और रिसीव लेटर देने का भरोसा भी दिलाया।
CBI और RBI के नाम पर भेजे फर्जी दस्तावेज
ठगों ने अपनी बात को सच साबित करने के लिए CBI और RBI के नाम से कथित दस्तावेज भेजे। इनमें जितेंद्र सिंह राणा के नाम और ICICI बैंक खाते का विवरण दिया गया था। पुलिस की शुरुआती जांच में ये दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। फर्जी सरकारी दस्तावेजों और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर आरोपियों ने दंपती का भरोसा जीतने की कोशिश की।
बैंक पहुंचकर ट्रांसफर किए 22 लाख
CSP सोनू कुर्मी के मुताबिक प्रकाश और उनकी पत्नी 23 जुलाई से 4 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट रहे। इसी दौरान 2 अगस्त को प्रकाश बैंक पहुंचे और अपनी FD में जमा 22 लाख रुपए आरोपियों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद भी ठगों ने संपर्क बंद नहीं किया। उन्होंने वॉट्सऐप कॉल जारी रखे और दंपती को कॉल से जुड़े नंबर और रिकॉर्ड हटाने के लिए भी डराया।
11 अगस्त को सामने आई पूरी घटना
ठगी के बाद भी दंपती काफी डरे हुए थे। उन्होंने तुरंत किसी को घटना की जानकारी नहीं दी। 11 अगस्त की रात प्रकाश अपने परिचित अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के पास पहुंचे और पूरी घटना बताई। इसके बाद सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
