गोटमार मेले का ‘खूनी खेल’! घायल की 21 दिन बाद मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
पांढुर्णा में गोटमार मेले के दौरान पत्थर लगने से गंभीर रूप से घायल हुए 55 वर्षीय जीवन सलामे की 21 दिन बाद मौत हो गई।
Gotmar Mela: पांढुर्णा जिले का बहुचर्चित गोटमार मेला एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। 11 सितंबर को जाम नदी के तट पर पत्थरों की बारिश के बीच घायल हुए जीवन ने गुरुवार शाम दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान जवाहर वार्ड निवासी जीवन सलामे के रूप में हुई है, जो इस मेले में सिर्फ खेल देखने पहुंचे थे। पूरे 21 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद जीवन की मौत ने प्रशासन के पुख्ता सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।
दर्शक बनकर गए थे जीवन, आ गिरा मौत का पत्थर
बताया जा रहा है कि जीवन सलामे गोटमार मेला देखने के लिए वहां मौजूद थे। इसी दौरान अचानक एक भारी पत्थर सीधा उनके माथे पर आकर लगा। पत्थर लगते ही वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
नागपुर में हुआ था ऑपरेशन, घर लौटते ही बिगड़ी तबीयत
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने जीवन को पांढुर्णा के सिविल अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद हालत नाजुक देखते हुए उन्हें तुरंत नागपुर रेफर कर दिया गया। नागपुर के अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि माथे की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर है। इसके बाद 12 सितंबर को डॉक्टर की टीम ने उनके सिर का ऑपरेशन किया था।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर बिगड़ी तबीयत
23 सितंबर को लंबे इलाज के बाद हालत में मामूली सुधार दिखने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। हालांकि, घर लौटने के बाद उनकी सेहत में सुधार होने के बजाय गिरावट आने लगी और आखिरकार गुरुवार शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली।
गोफन से पत्थर चलाने वाले दो युवक गिरफ्तार
इधर, गोटमार मेले के दौरान गोफन से पत्थर चलाने के मामले में प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गुरुवार को दो युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
गोटमार मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल
गोटमार मेले में पांढुर्णा और सावरगांव की ओर से जाम नदी के दोनों किनारों पर पत्थरबाजी होती है। हर साल की तरह इस बार भी गोटमार मेले से पहले प्रशासन और पुलिस बल ने सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए थे। इसके बावजूद सेकड़ों लोग इन उड़ते पत्थरों का शिकार होकर घायल हुए। अब जीवन सलामे की मौत के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
परंपरा के बीच सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
गोटमार मेला पांढुर्णा की पुरानी परंपरा से जुड़ा आयोजन है, लेकिन इसमें होने वाली पत्थरबाजी के कारण हर साल लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं। जीवन सलामे की मौत ने इस परंपरा के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा खड़ी कर दी है।
क्या ‘खूनी खेल’ पर लगेगी रोक?
इस दुखद घटना के बाद जहां एक तरफ मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा इंतजामों को लेकर गहरी चिंता है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मौत के बाद प्रशासन इस खूनी खेल को रोकने या इसके नियम बदलने के लिए कोई कड़ा कदम उठाता है, या अगले साल फिर किसी 'जीवन' को इस परंपरा की भेंट चढ़ने के लिए छोड़ दिया जाएगा।



