Forest Dept Promotion : वनकर्मियों की पदोन्नति सूची में गड़बड़ी! बिना नोटिस वेतन काटा, डिंडौरी विधायक से मिले नाराज कर्मचारी
Forest Dept Promotion : कर्मचारियों ने बताया कि बिना नोटिस वेतन कटौती करना नियमों के विरुद्ध है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
Forest Dept Promotion : मध्य प्रदेश। डिंडौरी जिले में वन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। कथित अनियमितताओं से नाराज प्रभावित वनकर्मी शुक्रवार को शहपुरा से भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे के आवास पहुंचे। कर्मचारियों ने विधायक को पदोन्नति सूची में हुई गड़बड़ियों की जानकारी दी और निष्पक्ष जांच की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में विभागीय नियमों और वरिष्ठता सूची का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इस कारण जिले के करीब 75 वनकर्मियों का प्रमोशन रुक गया है। विधायक ने कर्मचारियों की बात सुनने के बाद मामले को मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने उठाने का भरोसा दिया है।
नियमों की अनदेखी और वसूली अवधि बढ़ाने का आरोप
वनरक्षक ज्योति सरोज धुर्वे ने बताया कि 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति सूची में विभागीय नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक 1 अप्रैल 2025 की वरिष्ठता सूची के आधार पर होनी चाहिए थी।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने वसूली की निर्धारित अवधि को वर्ष 2025 तक सीमित रखने के बजाय जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया। इससे कई वरिष्ठ वनकर्मी पदोन्नति के लिए अपात्र घोषित हो गए, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था।
बिना सूचना वेतन कटौती और कर्मचारियों में नाराजगी
प्रभावित कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग ने वसूली से संबंधित कोई पूर्व सूचना जारी नहीं की। इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन से सीधे 140 से 200 रुपये तक की राशि काट ली गई।
कर्मचारियों का कहना है कि बिना नोटिस वेतन कटौती करना नियमों के विरुद्ध है। इस कार्रवाई से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विधायक ने दिया कार्रवाई का भरोसा
वनकर्मियों का कहना है कि वर्ष 1999 से 2008 के बीच भर्ती हुए कई अनुभवी वनरक्षक पदोन्नति से वंचित रह गए, जबकि बाद में नियुक्त कुछ जूनियर कर्मचारियों को प्रमोशन मिल गया। इससे फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है।
भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि 11 साल बाद हो रही पदोन्नति में छोटे आर्थिक दंड को आधार बनाकर कर्मचारियों को उनके अधिकार से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव के सामने रखा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आगामी विधानसभा सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी लाया जाएगा।