Salichauka Hospital Dr Shortage : सालीचौका अस्पताल में डॉक्टरों का संकट गहराया, मरीजों- परिजनों की बढ़ी मुश्किलें
Salichauka Hospital Dr Shortage : अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार देने के बाद अधिकांश मरीजों को गाडरवारा सिविल अस्पताल या जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
Salichauka Hospital Dr Shortage : मध्य प्रदेश। नरसिंहपुर के सालीचौका अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। पिछले एक महीने से अस्पताल में कोई भी नियमित डॉक्टर तैनात नहीं है। इसका सीधा असर इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार देने के बाद अधिकांश मरीजों को गाडरवारा सिविल अस्पताल या जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को समय पर इलाज नहीं मिलने से अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की अनुपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं।
पोस्टमार्टम के लिए 20 किलोमीटर दूर ले जाने की मजबूरी
डॉक्टरों की कमी का असर पोस्टमार्टम व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सालीचौका अस्पताल में संदिग्ध मौत या सड़क दुर्घटना जैसे मामलों में पोस्टमार्टम की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे सभी मामलों में शवों को लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित गाडरवारा सिविल अस्पताल भेजा जा रहा है।
इससे मृतकों के परिजनों को आर्थिक बोझ उठाने के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था समय और संसाधनों दोनों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
चार स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी पर
डॉक्टरों की कमी केवल सालीचौका अस्पताल तक सीमित नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चीचली, बारहाबड़ा और शाहपुर भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। इन चारों स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं एक ही ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के भरोसे संचालित हो रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
बीएमओ ने डॉक्टरों की कमी की पुष्टि की
गाडरवारा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि उनकी मूल पदस्थापना बारहाबड़ा में है, जबकि उनके पास बीएमओ का अतिरिक्त प्रभार भी है। प्रशासनिक कार्यों और बैठकों में व्यस्त रहने के कारण वे मरीजों के उपचार और मेडिकल लीगल मामलों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं।
उन्होंने बताया कि सालीचौका अस्पताल में फिलहाल कोई नियमित ड्यूटी डॉक्टर नहीं है। इसी कारण मेडिकल लीगल मामलों और पोस्टमार्टम के लिए शवों को गाडरवारा भेजना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही पत्र के माध्यम से भेजी जा चुकी है।