MP Contaminated Water : जबलपुर में दूषित पानी का बड़ा खुलासा! NGT ने कलेक्टर-निगम को दी फटकार, 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
MP Contaminated Water : NGT ने निर्देश दिया कि जिला प्रशासन, नगर निगम और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे और रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
MP Contaminated Water : मध्य प्रदेश। जबलपुर में नालों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन और दूषित पानी की शिकायतों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।
एनजीटी ने निर्देश दिया है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले दिए गए निर्देशों का समय पर पालन नहीं किया गया, जिसे गंभीर माना गया है।
पहले के आदेश का पालन नहीं होने पर NGT ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि पहले जारी किए गए आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण नहीं किया। ट्रिब्यूनल के अनुसार, यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है। अप्रैल 2026 में गठित नोडल एजेंसी ने 16 जुलाई को एनजीटी को बताया कि जिला प्रशासन और नगर निगम के असहयोग के कारण संयुक्त निरीक्षण नहीं हो सका।
इस नोडल एजेंसी में कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को शामिल किया गया था। इसके बाद एनजीटी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए।
पेयजल की गुणवत्ता पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने ट्रिब्यूनल के सामने दावा किया कि जबलपुर शहर की लगभग 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नालों के बीच से गुजर रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि शहर में उपलब्ध करीब 47 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पाइपलाइन की खराब स्थिति के कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इन दावों को देखते हुए एनजीटी ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच कराने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट नहीं देने और विभागीय असहयोग पर उठे सवाल
नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर याचिका पर अप्रैल 2026 में एनजीटी ने नगर निगम और जिला प्रशासन से एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसके बाद 10 जुलाई 2026 की सुनवाई में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ट्रिब्यूनल को बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग के अभाव में संयुक्त निरीक्षण संभव नहीं हो पाया। एनजीटी ने विभागों के बीच समन्वय की कमी को गंभीर बताते हुए इसे तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।
मरम्मत योजना नहीं होने पर चिंता
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि शहर की अधिकांश पेयजल पाइपलाइन 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, लेकिन अब तक उनके सुधार या बदलाव के लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं की गई है। न तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाई गई और न ही व्यापक मरम्मत कार्य शुरू किया गया। ट्रिब्यूनल ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया और अधिकारियों को स्थिति का वास्तविक आकलन करने के निर्देश दिए।
