नई दिल्ली । भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में मई महीने के दौरान निवेशकों के व्यवहार और विभिन्न फंड श्रेणियों के प्रदर्शन ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। जहां कुछ विशेष थीमैटिक और माइक्रो-कैप फंड्स ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, वहीं निवेश का सबसे बड़ा प्रवाह अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर माने जाने वाले लार्ज-कैप फंड्स की ओर जारी रहा। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि निवेशक बेहतर रिटर्न की तलाश के साथ-साथ जोखिम प्रबंधन को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
मई के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र पर आधारित बीएफएसआई थीमैटिक फंड्स ने शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी ने लगभग 5.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जिससे यह महीने की सबसे चर्चित निवेश श्रेणियों में शामिल रही। इन फंड्स में बड़ी संख्या में प्रमुख बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर शामिल होने के कारण निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न प्राप्त हुआ। बेहतर प्रदर्शन के चलते इस श्रेणी में उल्लेखनीय निवेश भी दर्ज किया गया।
इसी अवधि में माइक्रो-कैप फंड्स ने लगभग 5.7 प्रतिशत का रिटर्न देकर सभी प्रमुख श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि रिटर्न के मामले में यह सबसे आगे रहे, लेकिन निवेशकों की ओर से इन फंड्स में अपेक्षाकृत सीमित निवेश देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो-कैप कंपनियों में जोखिम अधिक होने के कारण अधिकांश निवेशक अभी भी सावधानी बरत रहे हैं।
स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। स्मॉल-कैप योजनाओं ने निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न दिया और इनमें अच्छा निवेश प्रवाह बना रहा। वहीं मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, हालांकि रिटर्न अपेक्षाकृत सीमित रहा। यह दर्शाता है कि निवेशक मध्यम और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को देखते हुए इन श्रेणियों में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं।
दिलचस्प तथ्य यह रहा कि मई में सबसे कम रिटर्न देने वाली प्रमुख श्रेणी लार्ज-कैप फंड्स रही, लेकिन निवेश के मामले में यही वर्ग सबसे आगे रहा। इन फंड्स में हजारों करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो अन्य कई श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के माध्यम से होने वाला नियमित निवेश है, जो बड़ी और स्थापित कंपनियों पर आधारित योजनाओं में लगातार प्रवाहित होता रहता है।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। विभिन्न बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश की स्वतंत्रता के कारण ये योजनाएं निवेशकों को विविधीकरण का लाभ देती हैं। इसी वजह से इन फंड्स में भी उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया और इनका प्रदर्शन स्थिर बना रहा।
मई के दौरान एसआईपी निवेश ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। देशभर के करोड़ों निवेशकों ने नियमित निवेश के माध्यम से बाजार में अपनी भागीदारी बनाए रखी। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यह संकेत देती है कि भारतीय निवेशक अब दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के लिए व्यवस्थित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति आधार भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है। बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बड़ी मात्रा में खरीदारी कर बाजार को स्थिरता प्रदान की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी अब भारतीय शेयर बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेशकों का ध्यान प्रदर्शन और स्थिरता दोनों पर केंद्रित रहेगा। ऐसे में लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और मजबूत सेक्टोरल फंड्स निवेशकों की पसंद बने रह सकते हैं, जबकि उच्च जोखिम लेने वाले निवेशक माइक्रो और स्मॉल-कैप अवसरों पर भी नजर बनाए रखेंगे।